PACL घोटाले में बड़ा एक्शन: ईडी ने 15,582 करोड़ की संपत्तियां लोढ़ा कमेटी को सौंपी, निवेशकों को राहत की उम्मीद

चंडीगढ़। बहुचर्चित पीएसीएल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 15,582 करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य वाली 455 अचल संपत्तियों को जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है, जिसका मकसद लाखों निवेशकों को उनकी फंसी रकम लौटाना है।
कुल अटैचमेंट 27,030 करोड़ के पार
ईडी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में ही करीब 26,324 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जिससे इस मामले में कुल अटैचमेंट बढ़कर 27,030 करोड़ रुपये हो गया है। इन संपत्तियों में भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया समेत विदेशों में स्थित परिसंपत्तियां भी शामिल हैं।
किनके नाम पर मिली संपत्तियां
जांच में सामने आया है कि ये संपत्तियां पीएसीएल लिमिटेड, उससे जुड़ी कंपनियों और दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार व सहयोगियों—बरिंदर कौर, हरसतिंदर पाल सिंह हेयर, सुखविंदर कौर, गुरप्रताप सिंह और प्रेम कौर—के नाम पर पाई गई हैं।
68 हजार करोड़ की अवैध स्कीम का खुलासा
सीबीआई ने 19 फरवरी 2014 को पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि निर्मल सिंह भंगू और उनके सहयोगियों ने एक अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए देशभर से 68,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई। निवेशकों को भ्रामक दस्तावेजों—एग्रीमेंट और स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी—पर हस्ताक्षर कराए गए और कई मामलों में बिना जमीन स्वामित्व के ही अलॉटमेंट लेटर जारी कर दिए गए।
अब भी 48 हजार करोड़ लौटाना बाकी
घोटाले में करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाया जाना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को सेबी को जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्देश दिया था, ताकि संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों को भुगतान किया जा सके।
जांच में गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई
ईडी ने 26 जुलाई 2016 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि अवैध धन को विभिन्न कंपनियों के जरिए घुमाकर देश-विदेश में संपत्तियां खरीदी गईं। इस मामले में हरसतिंदर पाल सिंह हेयर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बरिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। कुछ आरोपितों के खिलाफ भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
पंजाब सरकार ने भी तेज की जांच
पंजाब में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए। इसके तहत राज्य के सभी जिलों में पीएसीएल की संपत्तियों की पहचान कर सूची तैयार की गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट और लोढ़ा कमेटी के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।



