बस्तर में माओवाद को बड़ा झटका: 5 जिलों में 35 नक्सलियों का सरेंडर, 11 करोड़ का सोना समेत भारी संपत्ति बरामद

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार को बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर और नारायणपुर जिलों में कुल 35 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार और करोड़ों की संपत्ति बरामद की गई है, जिसे माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
बीजापुर में सबसे बड़ी कार्रवाई, 25 नक्सलियों ने डाले हथियार
बीजापुर जिले में सबसे बड़ी सफलता मिली, जहां 25 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा बलों ने इनके पास से 93 हथियार बरामद किए, जिनमें चार एके-47 और नौ एसएलआर राइफलें शामिल हैं। इसके अलावा ₹14.06 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई, जिसमें ₹2.90 करोड़ नकद और 7.2 किलोग्राम सोना शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹11.16 करोड़ बताई जा रही है।
दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर में भी कार्रवाई
दंतेवाड़ा जिले में पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनके पास से आठ एसएलआर सहित अन्य हथियार बरामद हुए। सुकमा जिले में दो माओवादियों ने सरेंडर किया, जहां से एक एलएमजी, दो एके-47 राइफल और ₹10 लाख नकद बरामद किए गए। वहीं नारायणपुर जिले में एक माओवादी ने आत्मसमर्पण किया, जिसके पास से एक एलएमजी बरामद हुई।
कांकेर में भी दो नक्सली मुख्यधारा में लौटे
कांकेर जिले में दो माओवादियों—शंकर और हिडमा डोडी—ने सशस्त्र संघर्ष छोड़कर आत्मसमर्पण किया। उन्होंने एके-47 राइफल पुलिस के समक्ष सौंपी। जानकारी के अनुसार, 25 मार्च से अब तक इस जिले में 11 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जो क्षेत्र में बदलते हालात का संकेत है।
सुकमा में मुठभेड़ में एक माओवादी ढेर
इससे पहले रविवार को सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना क्षेत्र में डीआरजी के साथ मुठभेड़ में एक माओवादी मारा गया था। उसकी पहचान पीपीसीएम मुचाकी कैलाश के रूप में हुई, जो प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर था और उस पर ₹5 लाख का इनाम घोषित था। वह कई आपराधिक मामलों में वांछित था, जिनमें नागरिकों की हत्या, हमले और आईईडी विस्फोट की साजिश शामिल थी।
लगातार ऑपरेशन और पुनर्वास नीति का असर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन, सरकार की पुनर्वास नीति और विकास कार्यों के चलते माओवादी संगठन कमजोर होता जा रहा है। बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण करना इस बात का संकेत है कि अब वे मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है।



