झारखंड में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: PLFI कमांडर हाबिल मुंडू ने किया सरेंडर, एक लाख का था इनामी

खूंटी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां झारखंड सरकार के नक्सल उन्मूलन अभियान को अहम कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के एरिया कमांडर हाबिल मुंडू उर्फ प्रफुल्ल मुंडू ने बुधवार को प्रशासन और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 22 गंभीर मामले दर्ज थे।
प्रशासन के सामने सरेंडर, मिला सम्मान और प्रोत्साहन
हाबिल मुंडू ने खूंटी की उपायुक्त आर रॉनिटा और पुलिस अधीक्षक मनीष टोप्पो के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस मौके पर उसे पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया और एक लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक भी सौंपा गया। आत्मसमर्पण के दौरान उसकी पत्नी अपने पांच महीने के बच्चे के साथ मौजूद रही, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को भावनात्मक बना दिया।
हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
सरेंडर के वक्त हाबिल मुंडू ने पुलिस को एक 9 एमएम पिस्टल, एक 7.65 एमएम पिस्टल, एक देशी कट्टा, 13 जिंदा कारतूस और दो वॉकी-टॉकी सौंपे। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और संयुक्त अभियानों के चलते उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों पर लगाम लगी है।
‘नई दिशा’ नीति का दिखा असर
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति “नई दिशा” का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। इसी नीति से प्रभावित होकर हाबिल मुंडू ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी उठाई जाएगी।
22 मामलों में था वांछित, कई थानों में दर्ज केस
हाबिल मुंडू खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के कोड़ाकेल पंचायत के बम्हनी गांव का निवासी है। उसके खिलाफ मुरहू, खूंटी, कर्रा और तोरपा थानों में उग्रवादी हिंसा समेत करीब 22 मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था।
संगठन से मोहभंग, परिवार बना वजह
जानकारी के मुताबिक, हाबिल वर्ष 2012 में जमीन विवाद के चलते पीएलएफआई से जुड़ा था और धीरे-धीरे एरिया कमांडर बन गया। वर्ष 2016 में गिरफ्तारी के बाद वह करीब 7 साल जेल में रहा और 2023 में रिहा हुआ। रिहाई के बाद फिर संगठन से जुड़ा, लेकिन इस दौरान उसके जीवन में बड़ा बदलाव आया।
मुरहू क्षेत्र में एक युवती से मुलाकात के बाद दोनों के बीच संबंध बने और वर्ष 2025 में उन्होंने शादी कर ली। अब उनका एक छोटा बच्चा भी है। परिवार की जिम्मेदारियों और संगठन के भीतर बढ़ते शोषण से निराश होकर उसने आत्मसमर्पण का फैसला लिया।
संगठन पर लगाए गंभीर आरोप
हाबिल मुंडू ने कहा कि पीएलएफआई अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुका है और अब केवल लेवी वसूली व शोषण तक सीमित रह गया है। उसने बताया कि वह अब सामान्य जीवन जीते हुए खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करना चाहता है।
अन्य उग्रवादियों से भी सरेंडर की अपील
उपायुक्त ने अन्य उग्रवादियों से भी अपील की है कि वे सरकार की नीति से जुड़कर आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा में लौटें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास का लाभ मिलेगा, लेकिन दर्ज मामलों में उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।



