मोदी सरकार में बिहार का रेल बजट 9 गुना बढ़ा, मंत्री बोले- मलेशिया से बड़ा नेटवर्क तैयार

पटना। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के रेल बजट में बिहार को ऐतिहासिक सौगात मिली है। वर्ष 2009–14 में राज्य को औसतन 1,132 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष मिलते थे, वहीं इस वर्ष रेल बजट 10,379 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, यानी लगभग नौ गुना वृद्धि। इससे स्पष्ट होता है कि केंद्र बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
रेल नेटवर्क और परियोजनाओं में जबरदस्त विस्तार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य में 98 स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित किया जाएगा। वर्तमान में बिहार में 14 जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस, 21 जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस और एक जोड़ी नमो भारत एक्सप्रेस चल रही हैं। 2014 के बाद बिहार में लगभग 2,000 किलोमीटर नई रेल पटरियों का निर्माण हुआ, जो मलेशिया के पूरे रेल नेटवर्क से भी लंबा है। इस दौरान 3,330 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण कर राज्य में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया।
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बदलेगा सफर का अनुभव
सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसमें दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर बिहार के लिए अहम माने जा रहे हैं। रेल मंत्री ने कहा कि वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर से यह यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट और दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
स्टेशन और यात्री सुविधाओं में सुधार
बिहार में 1,09,158 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे की आधारभूत संरचना परियोजनाएं चल रही हैं। 3,287 करोड़ रुपये की लागत से 98 अमृत भारत स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। थावे और पीरपैंती स्टेशन का कार्य पूरा हो चुका है। राज्य में अब तक 568 रेल फ्लाईओवर और अंडरपास बन चुके हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में कमी आई है।
यात्री संगठन ने जताई निराशा
हालांकि, बिहार डेली पैसेंजर्स एसोसिएशन ने बजट को यात्री सुविधाओं के लिहाज से निराशाजनक बताया। एसोसिएशन ने कहा कि जिन स्टेशनों पर प्रतिदिन 100 से कम टिकट बिकते हैं, वहां टिकट काउंटर बंद करने की तैयारी है, जिससे यात्रियों को परेशानी होगी।



