राम कुमार सिंह
देहरादून: होली के रंगों में सजा यह चित्र केवल एक त्योहार का दृश्य नहीं, बल्कि भावनाओं की एक सजीव कहानी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री अपनी माताजी के साथ खड़े हैं।माथे पर अबीर-गुलाल, चेहरे पर मुस्कान और आंखों में आत्मीयता। यह तस्वीर सत्ता के शिखर पर बैठे एक जननेता के उस रूप को सामने लाती है, जहाँ वे सबसे पहले एक बेटे हैं।

होली का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को रंगने और मन की दूरियों को मिटाने का अवसर है। जब एक माँ अपने बेटे के चेहरे पर प्रेम से रंग लगाती है, तो वह केवल गुलाल नहीं, बल्कि आशीर्वाद, स्नेह और जीवन भर की शुभकामनाएँ भी अर्पित करती है। इस तस्वीर में माँ के हाथों का स्पर्श और बेटे का स्नेहिल भाव, दोनों मिलकर उस अनमोल बंधन को व्यक्त करते हैं जिसे शब्दों में पूरी तरह बाँध पाना कठिन है।

माँ और बेटे का रिश्ता दुनिया के सबसे पवित्र संबंधों में से एक है। एक माँ अपने बेटे को संघर्षों से लड़ना सिखाती है, संस्कार देती है और हर सफलता के पीछे मौन शक्ति बनकर खड़ी रहती है। सार्वजनिक जीवन में व्यस्त रहने वाले किसी भी नेता के लिए माँ का आशीर्वाद ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत होता है। इस चित्र में भी वही भाव दिखाई देता है। एक ओर जिम्मेदारियों से भरा सार्वजनिक जीवन, तो दूसरी ओर माँ के सान्निध्य में सुकून और अपनापन।

होली का यह दृश्य यह भी संदेश देता है कि चाहे व्यक्ति कितना भी ऊँचा पद क्यों न प्राप्त कर ले, उसकी जड़ें उसके परिवार और संस्कारों में ही होती हैं। माँ के साथ बिताए ऐसे क्षण जीवन की असली पूँजी होते हैं। रंगों से सजी यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि प्रेम, आशीर्वाद और परिवार ही जीवन के सबसे सच्चे रंग हैं।

होली के अवसर पर माँ-बेटे का यह स्नेहिल दृश्य समाज को यह प्रेरणा देता है कि रिश्तों की गर्माहट बनाए रखें, बड़ों का सम्मान करें और जीवन के हर रंग को अपनापन और प्रेम से स्वीकार करें। यही होली का सच्चा संदेश है।क्योंकि होली का त्यौहार रंगों से बढ़कर रिश्तों का उत्सव भी हैं।
(लेखक दस्तक टाइम्स से संपादक हैं)




