

एक्सीलिया स्कूल में उड़न सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह ने एथलेटिक्स ट्रैक व खेल मैदान का किया लोकार्पण

इससे पहले एक्सीलिया स्कूल पहुंचे दिग्गज एथलीट पद्मश्री मिल्खा सिंह का स्वागत स्कूल के संस्थापक निदेशक श्री एमएस त्यागी, चेयरमैन श्री डीएस पाठक, वाइस चेयरपर्सन श्रीमती मंजू पाठक और निदेशक श्री आशीष पाठक ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह प्रदान करके किया। इस अवसर पर स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती सोनिया वर्धन और महाप्रबंधक श्री शेखर वार्ष्णेय एवं श्रीमती शालिनी पाठक भी मौजूद थे।
जताई उम्मीद यहां से निकला कोई खिलाड़ी मेडल जीतेगा तो दोबारा आऊंगा

पाकिस्तान में उड़न सिख का खिताब पाने वाले मिल्खा सिंह ने कहा कि भारत एथलेटिक्स के क्षेत्र में आज काफी पिछड़ चुका है। मेरे हाथ में रोम में स्वर्ण पदक फिसल गया था और मैं चाहूंगा कि मेरे जीते जी कोई भारतीय एथलीट ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मिल्खा सिंह ने जब नंगे पैर दौड़कर रिकार्ड तोड़े तो आज तो सब सुविधाएं है तो फिर उम्मीद है कि हमसे आगे भी लोग निकले।
उन्होंने कहा कि मै अपनी जिदंगी में तीन बार रोया था पहली बार जब मेरे मां बाप बंटवारे के समय कत्ल कर दिए गए थे। फिर रोम ओलंपिक में मेडल चूकने पर रोया। अब उम्मीद है कि यहां अकादमी बने और यहां से मेडल भी निकले। इसके लिए यहां पर बेहतर कोच लाए जाए और उनको चार साल का समय भी दे। जब यहां से निकला कोई बच्चा मेडल निकालेगा तो मै यहां दोबारा आऊंगा। यहीं नहीं यहां पर बच्चों का लगातार मूल्यांकन भी करें।
इस अवसर पर उन्होंने एक शेर कहा कि हाथ की लकीरों से जिदंगी नहीं बनती, अजम (विलपावर) हमारा भी कुछ हिस्सा है जिदंगी बनाने का।

उन्होंने बताया कि लखनऊ से मेरी बहुत यादें जुड़ी है। मैने यहीं पर एएमसी सेंटर में लगे एथलेटिक्स ट्रैक पर प्रैक्टिस की थी, तब वहां सिंडर ट्रैक हुआ करता था। मैने यहीं पर 1956-57 में हुई आल इंडिया सर्विसेज एथलेटिक्स मीट में एशिया का बेस्ट समय निकालते हुए मेडल जीता था। हालांकि अब वहां पर ट्रैक बदल गया है लेकिन यादें पुरानी ताजा हो गई है।
उन्होंने इस अवसर पर मंच पर चली अपने जीवन पर बनी फिल्म भाग मिल्खा भाग को देखकर पुरानी यादें ताजा हो गई और कई दृश्यों को देखकर आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है।
उन्होंने कहा कि रोम ओलंपिक-1960 में मैं फोटो फिनिश से पिछड़कर चौथे स्थान पर रहा था। पहले 200 मी तो मैं तेजी से दौड़ा था लेकिन उसके बाद 250 मी पर थोड़ा धीमा पड़ गया था और एक बार जब आपकी स्पीड टूटी तो रिकवरी मुश्किल हो जाती है। उस समय अमेरिका के ए.डेविस ने जो पदक जीता था वह रिले रेस धावक थे। उनको एक खिलाड़ी के घायल होने से मौका मिला था।