Budget 2026: टूटेगी 75 साल पुरानी बजट परंपरा, निर्मला सीतारमण के भाषण में दिखेगा नए भारत का आर्थिक रोडमैप

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार यूनियन बजट पेश करते हुए आजादी के बाद से चली आ रही 75 साल पुरानी परंपरा को तोड़ने जा रही हैं। बजट 2026 में न सिर्फ घोषणाओं का अंदाज बदलेगा, बल्कि संसद में दिए जाने वाले बजट भाषण की संरचना में भी ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।
पार्ट बी में दिखेगा भारत के आर्थिक भविष्य का ब्लूप्रिंट
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट भाषण के पार्ट बी में अब केवल टैक्स प्रस्ताव और सीमित नीतिगत बदलावों तक बात नहीं रहेगी। पहली बार इसमें भारत के आर्थिक भविष्य की व्यापक और स्पष्ट तस्वीर पेश की जाएगी। इसमें अल्पकालिक प्राथमिकताओं के साथ-साथ देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों का भी विस्तार से उल्लेख होगा, जिसे अर्थशास्त्री और बाजार दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अब तक ऐसा रहा है बजट भाषण का ढांचा
अब तक बजट भाषण के पार्ट ए में सरकार की बड़ी घोषणाएं, विकास योजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और दीर्घकालिक लक्ष्य सामने आते थे। वहीं, पार्ट बी को परंपरागत रूप से डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बदलावों, शुल्कों और कुछ सीमित नीतिगत ऐलानों तक सीमित रखा जाता था। बजट 2026 में यह परंपरा पूरी तरह बदलने जा रही है।
21वीं सदी के दूसरे चरण पर फोकस
इस बार पार्ट बी में भारत की शॉर्ट टर्म आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ-साथ लॉन्ग टर्म विजन को प्रमुखता से रखा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे भारत की स्थानीय ताकतों, घरेलू क्षमताओं और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को सामने रखेगी। इससे यह साफ होगा कि आने वाले वर्षों में भारत किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
अर्थशास्त्रियों और निवेशकों की नजर पूरे रोडमैप पर
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब बाजार सिर्फ टैक्स दरों और राहतों पर नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक रोडमैप पर नजर रखेगा। बजट भाषण के पार्ट बी में भारत की मौजूदा स्थिति, संभावनाओं और वैश्विक भूमिका को लेकर सरकार की सोच को विस्तार से रखा जाएगा, जिससे अर्थव्यवस्था की दिशा और प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी।
परंपराएं तोड़ने का सिलसिला जारी
निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। 2019 में अपने पहले बजट के दौरान उन्होंने दशकों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए लेदर ब्रिफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही-खाता अपनाया था। पिछले चार वर्षों से बजट पूरी तरह पेपरलेस है और टैबलेट के जरिए पेश किया जा रहा है। बजट 2026 में भी यही परंपरा जारी रहेगी।
कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फिर रहेगा जोर
सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से कम फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब बाजार की नजर वित्त वर्ष 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी रेशियो कम करने की रणनीति पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का कोई स्पष्ट लक्ष्य घोषित करती है या नहीं।
कैपेक्स में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी के संकेत
वर्तमान वित्त वर्ष में कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। निजी क्षेत्र के अभी भी सतर्क रुख को देखते हुए सरकार के कैपेक्स पर फोकस बनाए रखने की संभावना है। अनुमान है कि बजट 2026 में कैपेक्स लक्ष्य में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी।
जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और योजनाओं पर रहेगी नजर
बजट में वित्त वर्ष 2027 के लिए नाममात्र जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी पेश किया जाएगा, जो महंगाई की भविष्य की दिशा का संकेत देगा। कई आकलनों के मुताबिक, सरकार 10.5 से 11 प्रतिशत के बीच नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का प्रोजेक्शन दे सकती है। इसके अलावा पीएम ग्राम सड़क योजना, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों के लिए आवंटन पर भी सबकी नजर रहेगी, ताकि ग्रामीण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाया जा सके।



