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Chaiti Chhath 2026: 22 मार्च से शुरू होगा लोक आस्था का महापर्व, 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ समापन

पटना। सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखने वाला चैती छठ महापर्व इस वर्ष 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में अनुशासन, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है।

चैत्र मास: सृष्टि आरंभ और नव संकल्प का प्रतीक
धर्म ग्रंथों के अनुसार चैत्र मास को सृष्टि का आरंभ माना गया है। यह समय नवसंवत्सर, नई ऊर्जा और नए संकल्प का प्रतीक होता है। ऐसे में सूर्योपासना और षष्ठी पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है।

वैदिक परंपरा से जुड़ी है सूर्योपासना
ज्योतिष आचार्य पंडित राजनाथ झा के अनुसार ऋग्वेद में सूर्य को सृष्टि का केंद्र बताया गया है। अस्ताचल और उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा इसी वैदिक भावना को दर्शाती है। षष्ठी देवी को संतान की सुरक्षा और समृद्धि की अधिष्ठात्री माना गया है। मिथिला और पूर्वांचल में यह पर्व विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

नहाय-खाय से शुरू होगा चार दिवसीय अनुष्ठान
ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार चैत्र शुक्ल चतुर्थी, 22 मार्च (रविवार) को भरणी नक्षत्र और वैधृति योग में व्रती नहाय-खाय करेंगे। इस दिन गंगा स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा के बाद अरवा चावल, कद्दू की सब्जी और चने की दाल का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा।

23 मार्च को खरना, शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत
23 मार्च (सोमवार) को कृत्तिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में व्रती दिनभर निराहार रहकर शाम को खरना पूजा करेंगे। गुड़, दूध और चावल से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा।

24-25 मार्च को अर्घ्य के साथ होगा समापन
24 मार्च (मंगलवार) को रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद 25 मार्च (बुधवार) को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रती पारण करेंगे और चार दिवसीय अनुष्ठान पूर्ण होगा।

चैती छठ 2026: तिथि और अनुष्ठान क्रम

  • 22 मार्च (रविवार): नहाय-खाय
  • 23 मार्च (सोमवार): खरना
  • 24 मार्च (मंगलवार): सायंकालीन अर्घ्य
  • 25 मार्च (बुधवार): उदीयमान सूर्य को अर्घ्य व पारण

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