दिल्ली सरकार का सख्त निर्देश: विधानसभा समितियों की बैठकों में अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य, गैरहाजिरी पर नहीं चलेगा काम

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी विभागों के सचिवों और प्रशासनिक प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे विधानसभा समितियों के साथ पूर्ण सहयोग करें और उनकी बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह निर्णय सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और विधायिका के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
जीएडी का सर्कुलर: बुलावे पर बैठक में पहुंचना होगा अनिवार्य
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से सोमवार को जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि विधानसभा सचिवालय द्वारा बुलाए जाने पर संबंधित प्रशासनिक सचिवों को समितियों की बैठकों में उपस्थित होना ही होगा। विधानसभा की विभिन्न समितियां अलग-अलग विभागों से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श, प्रस्तुतीकरण और आवश्यक जानकारी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तलब करती हैं। ऐसे में अब अधिकारियों की उपस्थिति को औपचारिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
विशेष परिस्थिति में विकल्प, लेकिन पूर्व स्वीकृति जरूरी
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में प्रशासनिक सचिव स्वयं बैठक में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो वे विषय की पूरी जानकारी रखने वाले किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को भेज सकते हैं। हालांकि इसके लिए पूर्व स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। सरकार ने साफ किया है कि बैठकों के सुचारू संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा या देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
रिपोर्ट और दस्तावेज समय पर देने के निर्देश
जीएडी ने प्रशासनिक सचिवों को यह भी निर्देश दिया है कि समितियों द्वारा मांगी गई रिपोर्ट, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से विधायी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और विधानसभा को विभागों की विशेषज्ञता व निर्णय-स्तर की जानकारी सीधे तौर पर मिल सकेगी। इससे नीति-निर्माण और समीक्षा की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार के इस फैसले को प्रभावी शासन और संस्थागत जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।



