
1912 हेल्पलाइन पर फीडबैक-रेटिंग सिस्टम लागू करने की मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली वितरण कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिषद का कहना है कि विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा और विभागीय हेल्पलाइन 1912 पर उपभोक्ताओं की शिकायतें समाधान के बिना ही निस्तारित दिखा दी जा रही हैं। परिषद ने शिकायत निवारण व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए फीडबैक और रेटिंग प्रणाली तत्काल लागू करने की मांग उठाई है।
टैरिफ आदेश के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के साथ खुला धोखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवंबर में जारी टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने लाइसेंसधारकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिकायत निवारण के बाद उपभोक्ताओं से फीडबैक और रेटिंग ली जाए, ताकि शिकायत निस्तारण समय, स्थानीय वितरण व्यवस्था की प्रतिक्रिया और सेवा गुणवत्ता का वास्तविक मूल्यांकन हो सके।
ओटीपी आधारित क्लोजर पर भी नहीं हुई कार्रवाई
अवधेश वर्मा ने कहा कि टैरिफ आदेश में यह भी निर्देश था कि हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के लिए ओटीपी आधारित क्लोजर की व्यवहारिकता का आकलन कर तीन महीने के भीतर कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिषद का आरोप है कि आदेशों को कागजों तक सीमित कर दिया गया है।
हेल्पलाइन व्यवस्था पर सवाल, आंकड़े सुधारने का आरोप
परिषद का कहना है कि मौजूदा हेल्पलाइन और वर्टिकल व्यवस्था उपभोक्ता हितों की रक्षा के बजाय केवल विभागीय आंकड़ों को बेहतर दिखाने का माध्यम बन गई है। शिकायतों को बिना वास्तविक समाधान के बंद दिखाकर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ओटीपी आधारित क्लोजर अनिवार्य करने की मांग
बिजली उपभोक्ता परिषद ने ओटीपी आधारित शिकायत क्लोजर को चरणबद्ध तरीके से लागू कर अनिवार्य बनाने की मांग की है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो नियामक आयोग के समक्ष दोबारा मामला उठाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा।



