व्यंगसाहित्य

चकल्लस : जौनपुर में विकास पैदा होगा???

अजीत सिंह

जगह-ईशा हॉस्पिटल जौनपुर है। डॉ साहब, बीबी को बच्चा होने वाला है क्या?
हां कितने दिन में होगा? वेवकूफ हो क्या? नौ महीने में और कितने दिन में?
तो ये पुल क्यों नहीं बना नौ साल में? अबे भाग, लफुआ हो क्या?

नौ साल पहले एक दिन अखबार में बड़ा-बड़ा निकला था, जौँनपुर में सिटी स्टेशन के ऊपर ओवर ब्रिज बनेगा, गोरखपुर से लेकर विंध्याचल जाने वाले लोग मां विंध्यवासिनी का दर्शन आसानी से करेंगे, धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, जौनपुर में विकास पैदा होगा।

पढ़ते ही जौनपुर के कई विकास पुरूष चिल्लाने लगे, मैंने ही शुरु किया है, मेरे कारण ही विकास पैदा होगा। जनता परेशान की एक विकास वो भी बिना पैदा हुए, इतने बाप अभी से आ गए, पता नहीं किसका है, कैसे मुँह दिखाएं, क्या करे? सुन के शेरवां के बबलू मैनेजर घर में सोहर गवाने लगे कि मेरा वाला नेता विकास को पैदा कर रहा है। “ललना हिन्द के सितारा ई तो सी एम होहिहै ना।”

बस पिलर खुदने लगा, पहले रास्ता ही बन्द कर दिया गया। कुछ लोगों ने कहा, “अरे भाई पिलर खोद रहे हो, किनारे से रास्ता दे दो आवागमन बना रहे, एकदम से बन्द कर दे रहे हो।
विकास पैदा करने में सहयोग कर रहा, ठेकेदार गरजा, तभी विकास नहीं होता इस जिले का, पढ़े लिखे हैं सब, लेकिन कढ़े नहीं है, होने के पहले ही कचर दे रहे विकास को।

इतना कह के उसने क्रासिंग के मेन सड़क को ही खोद दिया।  बोला, “लो अगर विकास पैदा करने में अड़चन डाले तो तुम्हारा विनाश निश्चित है ।”, रास्ता बंद जनता घबरा के उधर जाना बंद कर दिया। दो साल बीत गए, एक दिन मखनचु ने जाकर किसी से पूछा इतने दिन हुए, पुल बना नही विकास कब होगा?

तुम्हे पता नहीं है, मुन्ना बजरंगी ने रंगदारी मांगी है, कंही से आकाश वाणी हुई। कौन मुन्ना, काहे की रंगदारी, सहमे मखनचु ने प्रतिबाद किया। बुड़बक हो क्या यार? मुन्ना भैया को नहीं जानते, यमराज हैं, यमराज। मखनचु संन्न, जनता संन्न, प्रशासन और सरकार संन्न, पता नहीं चला कि मांगे थे या नहीं भी, सब चुप मारे सांस खिंचे रहे। लगा कि पुल का नाम लेते ही गोली चल जाएगी । चार साल बीता पुल कुछ बना औऱ अधूरा लटका रहा। किसी ने डरते डरते पूछा, हे भगवान विकास कब पैदा होगा?

अबे पता नहीं है क्या? क्या? डॉ रजनीश, ईशा हॉस्पिटल वाले कोर्ट से स्टे लिए हैं। क्यों, उनसे क्या मतलब? अबे बुड़बक हो क्या में, उनके जमीन पे सरकार पुल बना रही है। जौनपुर ने मुँह में दोहरा भर के समझाया। जनता को लगा कि ये तो गलत है, किसी दूसरी की कोख से विकास पैदा करना ठीक नहीं, जब सरकार नही पैदा कर पा रही थी तो रहने देती।

तभी कुछ दिन बाद हल्ला हुआ, अरे यार डॉ ने गलत स्टे लिया था खारिज हो गया, कोर्ट ने धमकाया भी है, अब विकास पैदा होकर रहेगा। धूम—धड़ाके से अधिकारी आने लगे, पेपर चिल्लाने लगा लखनऊ से सरकार आके देखा बोल दिया है, जल्दी करो, सब लोग मिल के विकास पैदा करो, जो देर करेगा दंड पायेगा। छह साल हो गए मखनचु फिर सकुचाते हुए पहुँचे, देखा पुल लटका है, पूछे-विकास होगा?

अबे बुड़बक हो क्या? अब क्या हुआ? बन विभाग की एनओसी नहीं मिली है अभी, समझे ।
तो क्यों खोद दिए, काहे छः साल से सबको चूत्तिया बना रहे, नहीं मिली थी तो ना बनाते।
अबे एकदम से ही बुड़बक हो क्या? ऐसे ही होता है, काम होता रहता है, परमिशन मिलती रहती है, समझे, दोहरा निकालो। किसका है? शंकर वाले का?

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हां तब दो, शंकरवा का मस्त होता है। बन जायेगापुल। चिंता क्यों करते हो, कोई काम रुका है, क्या? जौँनपुर पहले जैसे था वैसे अब भी है, देख लेना एक दिन विकास की गंगा गोमती में ना गिरा दू तो मेरा नाम जौनपुर नहीं। मुँह में दोहरा दबा के जौनपुर ने मखनचु को समझाया।

नौ साल बाद एक दिन अखबार फिर चिल्लाया, जिलाधिकारी ने कहा कि दिन रात काम होगा, पुल बनेगा, विकास का समय पूरा हो गया है, प्रसव पीड़ा का समय आ गया है शीघ्र ही जन्म लेगा।
एक सप्ताह बाद फिर पहुँचे पुल पे, दरोगा को बोले, रोज आओ देखो काम हो रहा कि नही, दिन और रात।

बिजली विभाग रास्ते का खम्भा हटाये। नगर पालिका अतिक्रमण हटाये, सिटी मजिस्ट्रेट रोज रहेंगे। प्रोजेक्ट मैनेजर ठेकेदार को पैसा तुरंत दे । आदेश सना सन्न जारी हुए, मखनचु भाग भाग के बता रहे, बस बस रुक जाइये होने वाला है, लड्डू खा के जाइयेगा, अब देर नहीं है।

आज नीरज ने फिर बताया-अरे भैया कुछ नहीं वही पांच छ, आदमी लगे हैं, सब वैसे का वैसा है। ये पुल है कोई नरेगा का तालाब नहीं है। व्यवस्था, “हां गई भैस पानी में है” बस किनारे बैठे रहिये, इंतजार करिये जब भैस निकलेगी तभी नाद पे जाएगी।

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मखनचु चिल्ला रहे हैं विकास तो हो के रहेगा ये जौनपुर का वादा है, विंध्यवासिनी मां कई बार मंदिर से निकल कर जौनपुर की तरफ झांक चुकी हैं कि लोग आते क्यों नहीं। विकास का मुंडन कब होगा? बबलू मैनेजर अपने नेता से पूछे कि आपने तो कहा था, विकास पैदा कर रहा हूँ।

नेता बोले, देखो मैनेजर मेरा जो काम था मैंने किया, शादी हुई, हनीमून मनाया, विकास के आगमन की शुभ सूचना भी दे दी, अब विकास पैदा करना जनता का काम है, संतान मां पैदा करती है बाप नहीं, समझे। नेता बाप होता है बाप।

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जौनपुर की जनता विकास को गर्भ में लिए बिलबिला रही है, किसी को दर्द की पीड़ा अगर महसूस हो रही हो तो वह जिलाधिकारी महोदय को बताये की अब आपरेसन की जरूरत है, नार्मल डिलीवरी नहीं होगी, सिजेरियन करिये सर, ऑपरेशन थियेटर खुलवा दीजिये, ये पुल है, स्कूल नहीं की रेलगाड़ी और राफाल की फोटो बना के विकास की पढ़ाई होने लगेगी। इसमे लगना होगा तभी विकास होगा।

तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है।
मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।।

साभार : सोशल मीडिया

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