बिगड़े सिस्टम से पुलिस विभाग हो रहा बीमार, अवकाश नहीं, काम के घंटे भी तय नहीं

जबलपुर : अपराधियों और तस्करों आदि को दबोचने में जी जान अड़ाने वाले सिपाही से लेकर अधिकारियों की आम जिंदगी की तस्वीर स्याह रंग से भरी हुई है। ड्यूटी और जिदंगी में से किसी एक को चुनना सहज नहीं है। आम आदमी की समस्याओं को सुलझाने वाला पुलिस विभाग यदि स्वयं समस्याओं में उलझ जाए तो आखिर कैसे होगी स्मार्ट पुलिसिंग, यह प्रश्र यक्ष है।
शासन प्रशासन के हर आदेश का पालन करवाना पुलिस विभाग की अहम जिम्मेदारी है। इसके साथ ही जनता, अधिकारियों और माननीय न्यायलय के प्रति जबावदेह रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना किसी चुनौती से कम नही। लेकिन इस सब के बावजूद अपने परिजनों का ध्यान रखना और परिवार की जिम्मेदारी उठाना टेड़ी खीर है।
मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के आने के साथ ही साथ पुलिस विभाग में वर्षों से लंबित अवकाश की व्यवस्था को चालू तो किया गया। लेकिन समय के साथ ही साथ सरकार बदलते ही स्थिति फिर बेपटरी हो गयी। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों से लेकर आरक्षक तक, बगैर छुट्टी के अपने कर्तव्यों को निभाते रहना, असहज है। अनेक बार पुलिस विभाग में अवकाश की मांग तो उठी लेकिन कर्मियों की कमी के चलते यह फिर दोबारा संभव ही नहीं हो पाया।
पुलिस थानों में सामान्य व्यवस्था के तहत एक कर्मचारी की ड्यूटी सुबह 7 बजे से शुरु होती है। जो दोपहर में 2 बजे तक थाने में ड्यूटी देगा। उसके बाद दोबारा वह रात में 9 बजे आएगा और अगले दिन सुबह 7 बजे घर जाएगा। इस प्रकार से यदि लंच टाइम को छोड़ दिया जाए तो एक कर्मचारी 12 से लेकर 14 घंटे लगातार ड्यूटी करता है, जबकि यह आदर्श व्यवस्था के विपरीत है।
इसी प्रकार थाने में थाना प्रभारी सुबह 10.30 बजे आते है और यदि सबकुछ ठीक रहा तो रात में एक बजे फ्री होते है। लेकिन यदि विपरीत परिस्थितियां निर्मित हुईं तो थाना प्रभारी सहित सभी अधिकारी को तत्काल मौके पर उपस्थित होना होगा।
ड्यूटी के घंटे निश्चित नहीं होने के कारण, लगातार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहने के कारण पुलिस कर्मचारियों और अधिकारी लगातर तनाव में है। जिस कारण स्वास्थ्य के लिहाज से हर दूसरा कर्मचारी बीमार है। यदि यही हाल रहा तो स्मार्ट पुलिसिंग की कवायद, केवल सपना मात्र बनकर रह जाएगी।
पुलिस विभाग में समान्यत: अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रति माह एक हजार 53 रपए एलाऊंस मिलता है। जिसमें फूड, सायकिल अलाऊंस शामिल है। तो वहीं अधिकारियों को तीन साल में एक बार 600 रुपये वर्दी अलाऊंस मिलता है और कर्मचारियों को 1650 किट एलाउसं रुपये प्रतिवर्ष भत्ता दिया जाता है। इस के अलावा वेतन का दस फीसदी हाउस रेंट भी दिया जाता है।