सुकमा में माओवाद का अंत: 16 लाख इनामी दो महिला नक्सलियों का सरेंडर, जंगलों से हथियार और 10 लाख नकद बरामद

नई दिल्ली। देश में लंबे समय से सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और रणनीतिक ऑपरेशन के बाद माओवाद लगभग खत्म होने की घोषणा की गई है। इस कड़ी में अंतिम दो महिला माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस लाइन में हुआ आत्मसमर्पण
मंगलवार दोपहर जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ डीआईजी आनंद सिंह की मौजूदगी में दोनों महिला माओवादियों ने सरेंडर किया। पुलिस के अनुसार, जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे, जो किस्टाराम थाना क्षेत्र के एलमागुंडा की निवासी है, और सोनी उर्फ माड़वी कोसी, जो गोरगुंडा की रहने वाली है, लंबे समय से जिले में सक्रिय थीं और कई घटनाओं में शामिल रही हैं।
सर्च ऑपरेशन में हथियार और नकदी बरामद
सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान जंगलों से भारी मात्रा में हथियार और नकदी बरामद की गई। इसमें 10 लाख रुपये नकद के साथ इंसास एलएमजी, दो एके-47 राइफल, तीन .303 राइफल, 14 एके-47 राउंड और 13 .303 राउंड शामिल हैं। ये सभी सामग्री माओवादियों द्वारा जंगलों में छिपाकर रखी गई थी।
सुकमा को घोषित किया गया माओवाद मुक्त
एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि जिले से माओवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है और सुकमा अब माओवाद मुक्त हो गया है। हालांकि एहतियात के तौर पर समय-समय पर छोटे ऑपरेशन जारी रहेंगे, ताकि किसी भी तरह की पुनर्सक्रियता को रोका जा सके।
विकास कार्यों पर रहेगा फोकस
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जवानों की रणनीति और हौसले से मिली सफलता
अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों के साहस, रणनीति और निरंतर प्रयासों को दिया है। सुकमा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में सक्रिय माओवादी बटालियन से मुकाबला आसान नहीं था, लेकिन जवानों के दृढ़ संकल्प ने अंततः माओवाद को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।



