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फतेहपुर में संतों की भक्ति से खुश होकर धरती से निकला था शिवलिंग

फतेहपुर में संतों की भक्ति से खुश होकर धरती से निकला था शिवलिंग

फतेहपुर: भगवान के प्रति भक्त की अनन्य आस्था, विश्वास, समर्पण जब होती है तो सभी मन्नतें पूरी होती हैं। जिला मुख्यालय स्थित ताम्बेश्वर बाबा मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा है।

यहां का हर व्यक्ति तमाम किदवंतियों की चर्चा कर इस शिवमंदिर के धार्मिक महत्व की पराकाष्ठा का बखान जरूर करता है जो अपने बुजुर्गों व पुरखों से सुनी है। लोगों का कहना है कि मंदिर के दर्शन मात्र से जिला जेल में बंद कैदी भी सजा से मुक्त हो जाते थे।

यह भगवान् शिवजी को समर्पित एक ऐतिहासिक मंदिर है। मंदिर गोल गुम्बदी है। इस मंदिर में भक्तों व भगवान के बीच श्रद्धा और विश्वास का अटूट बंधन देखने को मिलता है। मंदिर के गर्भ में अनेकों देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

मगर अर्ध नारीश्वर की मूर्ति भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण व आस्था का केंद्र है। सोमवार को विशेष तौर पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। सावन महीने में पड़ोसी जनपदों के कांवरियों के आने से मंदिर में पूजा-आरती का दृश्य बड़ा मनोरम होता है जिसे देख सभी भक्त भक्ति सागर में डूब आत्मविभोर हो उठते हैं। शहर मुख्यालय के आबूनगर मोहल्ले में स्थित तम्बेश्वर बाबा का मंदिर अति प्राचीन बताया जाता है।

फतेहपुर में मंदिर के महन्त राघवेन्द्र महाराज ने बताया कि इस मंदिर की मान्यता है कि प्राचीन काल में भक्तों की शिव भक्ति से संत इतना खुश हुए कि उनकी भक्ति से प्रेरित होकर इस स्थान पर ताम्बेश्वर बाबा के मंदिर का निर्माण कराया और शिवलिंग व अर्धनारीश्वर की मूर्ति की स्थापना की।

उन्होंने बताया कि मेरे गुरूजी बताते थे कि संत व सिद्धपुरुष शिव की तपस्या में इस हद तक लीन हो गए कि शिवजी ने उनकी तपस्या से खुश होकर धरती माता का सीना तोड़कर शिवलिंग के रूप में अपने भक्तों के समक्ष स्वयं प्रकट हुए थे तभी से इस पवित्र स्थान पर पूजा-अर्चना हो रही है।

भगवान् शिव के महात्म्य के विषय में फतेहपुर के भक्त दिनेश शर्मा ने एक किदवंती की चर्चा करते हुए बताया कि मान्यता यह भी है कि जिला जेल का मुख्य द्वार पहले मंदिर की ओर था। जेल का मुख्य द्वार और इस मंदिर का द्वार आमने-सामने थे जिसकी वजह से जेल में बंद कैदियों पर भगवान शिव जी की विशेष कृपा रहती थी।

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जब किसी कैदी की पेशी होती थी और यदि उसने द्वार से निकलते समय शिवमंदिर के दर्शन कर श्रद्धा स्वरूप सजा से मुक्त होने के लिए यदि कोई मन्नत मान ली तो शिवजी की कृपा से वह कैदी अवश्य छूट जाता था। जिससे बड़े-बड़े कैदी मन्नत मानने पर सजा से मुक्त हो जाते थे।

अपने बचपन से आज तक करीब 40 वर्ष से अनवरत शिव की पूजा करने वाले दीनदयाल सोनी का कहना है कि जब जेल से कैदियों के छूटने की बात की जानकारी जिला कारागार अधीक्षक को हुई तो उन्होंने जेल का मुख्य द्वार पूर्व से दक्षिण दिशा की ओर कर दिया था। जिससे वास्तव में जुर्म किये हुए कैदी मुक्त न हो पाए।

बाद में मंदिर के अन्दर राधा-कृष्णा, माँ दुर्गा, अन्नपूर्णा और सरस्वती जी की भी मूर्तियाँ स्थापित है यहाँ पर श्रद्धालु लोग रंग-विरंगे कपड़ों की पोटली बांधकर मनोकामनाएं मांगने आते हैं, साथ ही नारियल भी बांधते हैं।

फतेहपुर में विशेष तौर से शिवलिंग के दर्शन के लिए शिवभक्तों के आने का हमेशा तांता लगा रहता है। मंदिर में आरती-वंदना और हवन-पूजन करके भक्तजन अपने परिवार की सुख-समृद्धि और सलामती की दुआएं मांगते हैं। भक्तों को विश्वास है की तम्बेश्वर बाबा के दर्शन से वांछित मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं।

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