उत्तराखंड

उत्तराखंड में पांच नए योग धाम बनाए जाएंगे, CM धामी ने योग-आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का किया ऐलान

ऋषिकेश। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में कहा कि उत्तराखंड में योग नीति लागू होने के बाद सरकार पांच नए योग धाम स्थापित करने जा रही है। राज्य में आयुष वेलनेस और योग वेलनेस सेंटर भी बनाए जाएंगे। उनका उद्देश्य योग और आध्यात्मिक पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देना है।

योग को सार्वभौमिक विज्ञान के रूप में पेश किया
सीएम धामी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला सार्वभौमिक विज्ञान है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव के बाद आज 180 से अधिक देशों में योग का अभ्यास हो रहा है। उन्होंने उत्तराखंड को न केवल देवभूमि बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी बताया।

योग नीति 2025 और नए योग हब
उत्तराखंड सरकार ने पहली योग नीति 2025 लागू की है। इसके तहत योग और ध्यान केंद्र विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी और शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। राज्य में पांच नए योग हब बनाए जाएंगे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग पर्यटन को बढ़ावा देंगे।

वेलनेस और आयुष केंद्रों का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में आयुष नीति के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध और औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हैं। हर जनपद में 50 और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

योग और संगीत का संगम
महोत्सव में गायक पद्मश्री कैलाश खेर और कैलाशा बैंड की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि देवभूमि की पावन धरा योग और साधना की अनंत परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। डा. साध्वी भगवती सरस्वती ने महोत्सव को अनूठा बताया।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और योग का महत्व
स्विट्जरलैंड दूतावास के प्रथम सचिव साइमन सेवन शेफर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव जैसे आयोजन आवश्यक हैं, खासकर युद्ध और अशांति के समय। अमेरिका से आई योगाचार्या किया मिलर ने कहा कि मां गंगा के तट पर योग की ऊर्जा से विश्व के लोग जुड़ सकते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने कहा कि आयुर्वेद और योग केवल तकनीक नहीं बल्कि जीवन पद्धति हैं, जिसे सभी अपने साथ अपनाएं।

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