उत्तराखंड

श्री बद्रीनाथ कॉरिडोर में विकास के साथ पर्यावरण पर फोकस: IIRS की वैज्ञानिक स्टडी पेश, पारिस्थितिकी संतुलन को प्राथमिकता

देहरादून: उत्तराखंड में चल रहे श्री बद्रीनाथ कॉरिडोर विकास कार्यों के बीच पारिस्थितिकी संतुलन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। Indian Institute of Remote Sensing (IIRS) के वैज्ञानिकों ने निर्माण कार्यों के दौरान आसपास के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन तैयार किया है, जिसे मुख्य सचिव आनंद बर्धन के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

थर्मल रिमोट सेंसिंग और जियो-फिजिकल सर्वे पर आधारित अध्ययन

आईआईआरएस की टीम द्वारा श्री बद्रीनाथ क्षेत्र में जनवरी माह के दौरान पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया था। इस अध्ययन में थर्मल रिमोट सेंसिंग तकनीक और जियो-फिजिकल सर्वेक्षण का उपयोग किया गया। इसके जरिए क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, तापीय बदलाव और भू-भौतिकीय परिस्थितियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

प्रस्तुतीकरण के दौरान वैज्ञानिकों ने निर्माण गतिविधियों के संभावित प्रभावों और संतुलन बनाए रखने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। अध्ययन का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है।

पर्वतीय राज्य में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण अनिवार्य: मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि वर्तमान समय में इस प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील और पर्वतीय राज्य में विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। जहां-जहां इस तरह के वैज्ञानिक आकलन की आवश्यकता होगी, वहां इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा।

उन्होंने सर्वेक्षण के निष्कर्षों का आवश्यकता अनुसार सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए, ताकि भविष्य की परियोजनाओं में वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक

बैठक में सचिव डी. एस. गब्रियाल समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि श्री बद्रीनाथ कॉरिडोर के विकास कार्यों में पर्यावरणीय मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

Related Articles

Back to top button