राज्यसभा में विदेश मंत्री बोले- CCS बैठक में ईरान-अमेरिका तनाव पर लिए गए कड़े फैसले

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि भारत सरकार पूरी मुस्तैदी के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने साफ किया कि पीएम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में कई दूरगामी और कड़े फैसले लिए गए हैं।
28 फरवरी से बिगड़े हालातों पर विदेश मंत्री ने जताई चिंता
सदन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने बताया कि तनाव की मौजूदा लहर 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई, जब ईरान के नेतृत्व वाले ठिकानों सहित कई क्षेत्रों पर भीषण हमले हुए। इन हमलों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, जिसे विदेश मंत्री ने ‘वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती’ करार दिया। उन्होंने सभी पक्षों से तत्काल प्रभाव से संयम बरतने और युद्ध रोकने की अपील की है।
CCS बैठक के बड़े फैसले
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च 2026 को CCSकी उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मुख्य रूप से दो मोर्चों पर चर्चा हुई:
क्षेत्रीय सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सामरिक हितों की रक्षा।
आर्थिक प्रभाव: युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले संभावित असर का विश्लेषण।
जयशंकर ने कहा, “सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित कदम उठाएं।”
भारत की अपील: कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
भारत ने दोहराया है कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। विदेश मंत्री ने राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और लाखों प्रवासी भारतीयों के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।



