गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण अब स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होने जा रही है। राज्य सरकार ने तीन पहाड़ी शहरों में स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया है, जिसमें गैरसैंण भी शामिल है। यह कदम क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजधानी बनने की लंबी कहानी
गैरसैंण का ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने का प्रस्ताव नई बात नहीं है। छह साल पहले राज्य सरकार ने गैरसैंण के चारों ओर 45 किलोमीटर की परिधि वाले क्षेत्र को राज्य राजधानी क्षेत्र बनाने की योजना बनाई थी। हालांकि, यह योजना फाइलों तक ही सीमित रही और अब तक लागू नहीं हो पाई। साथ ही, गैरसैंण को नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद में बदलने का सपना भी अधूरा रहा। चुनावी साल में स्मार्ट सिटी के रूप में इसे विकसित करने की संभावना ने स्थानीय निवासियों में उत्साह बढ़ा दिया है।
सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व
गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के बीच स्थित चमोली जिले का गैरसैंण केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की भावनाओं के लिहाज से भी खास है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद राजनीतिक दलों ने अक्सर गैरसैंण का नाम सियासी लाभ के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन इसे राजधानी बनाने में कतराते रहे। चार मार्च 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आखिरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षित उम्मीदों को बल मिला।
45 किलोमीटर के क्षेत्र का विकास
तत्कालीन सरकार ने भराड़ीसैंण क्षेत्र सहित गैरसैंण के 45 किलोमीटर की परिधि को राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) बनाने का निर्णय लिया था। इस क्षेत्र में चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों के कर्णप्रयाग, थराली, चौखुटिया, द्वाराहाट और थलीसैंण शामिल थे। योजना का उद्देश्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजन के माध्यम से पूरे क्षेत्र का रूपांतरण करना था। अनुमानित खर्च 25,000 करोड़ रुपये का रखा गया था। इस योजना के साथ ही गैरसैंण को नगर पालिका परिषद का दर्जा देने का प्रस्ताव भी सामने आया था।
स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान
समुद्रतल से 7,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण को अब स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना में गैरसैंण से लेकर भराड़ीसैंण तक का क्षेत्र शामिल होगा। विधानसभा परिसर में मिनी सचिवालय के निर्माण और गैरसैंण विकास परिषद के बजट में प्रविधान करने की तैयारी भी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य गैरसैंण को पहाड़ का ऐसा शहर बनाना है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पर्यटन और प्रशासनिक केंद्र की भूमिका भी सशक्त हो।
भविष्य की राह और विकास
स्मार्ट सिटी बनने के बाद गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी संचालन की प्रक्रिया और प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है। इससे नगर पंचायत के उच्चीकरण की राह भी आसान होगी। इसके अतिरिक्त, भराड़ीसैंण में पहाड़ की बदरी गाय के एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे विधानसभा सत्र के बाद की खालीपन की स्थिति भी समाप्त होगी और क्षेत्र में जीवन की गति बढ़ेगी।




