मिडिल ईस्ट तनाव का वैश्विक असर: कहीं गैस की किल्लत तो कहीं पेट्रोल-डीजल की कमी, एशिया के कई देश मुश्किल में

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे एशिया के कई देशों में ईंधन संकट की आशंका गहराने लगी है। बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
बांग्लादेश में ईंधन खरीद पर लगी सीमा
ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने ईंधन की खरीद पर सीमा तय कर दी है। इस फैसले का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। राजधानी ढाका में लोग दिन में दो बार पेट्रोल पंपों की लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं।
स्थिति को देखते हुए भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए पाइपलाइन के जरिए करीब 5,000 मीट्रिक टन डीजल भेजने का फैसला किया है, ताकि वहां बिजली उत्पादन और परिवहन सेवाओं पर ज्यादा असर न पड़े।
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से सप्लाई पर असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते हमलों के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण कई तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
इस स्थिति को संभालने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, ताकि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहे।
भारत में भी बढ़ा दबाव
दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल भारत पर भी इस संकट का असर पड़ने लगा है। कई राज्यों में लोग गैस सिलिंडर भरवाने के लिए कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। भारत अपनी लगभग 85 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है, जिसमें मध्य-पूर्व की बड़ी हिस्सेदारी है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने रिफाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कुछ औद्योगिक क्षेत्रों से ईंधन हटाकर घरेलू जरूरतों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
एशिया के कई देशों ने उठाए ऊर्जा बचत के कदम
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एशिया के कई देशों ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान ने स्कूलों को बंद करने और सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करने का फैसला किया है।
दक्षिण कोरिया ने लगभग 30 वर्षों बाद पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा तय की है। वहीं थाईलैंड और फिलीपींस ने सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा बचत के निर्देश जारी किए हैं।
आम लोगों में बढ़ी चिंता
बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण आम लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में मौजूदा संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर और ज्यादा गहरा हो सकता है।



