ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सरकार अलर्ट, निर्यातकों की मदद के लिए बना अंतर-मंत्रालयी समूह; पीयूष गोयल ने दिया भरोसा

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण होने के कारण समुद्री व्यापार, कच्चे तेल की कीमतों और माल ढुलाई पर दबाव बढ़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने निर्यातकों को होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की निगरानी के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है, जो लगातार स्थिति का आकलन कर रहा है और निर्यातकों से फीडबैक ले रहा है। गोयल ने यह बात भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के वाइस चांसलर कॉन्क्लेव से इतर मीडिया से बातचीत के दौरान कही। दरअसल, निर्यातकों ने युद्ध के कारण सामान की आवाजाही में आ रही रुकावटों को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।
पश्चिम एशिया में तनाव से व्यापार पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक कुछ शिपिंग कंपनियां 40 फुट के एक कंटेनर पर 4,000 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं। इसके अलावा कई जहाज अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
भारत के लिए पश्चिम एशिया एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र है। वर्ष 2025 में भारत ने इस क्षेत्र से करीब 98.7 अरब डॉलर का आयात किया था। ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति के लिए भारत काफी हद तक इस क्षेत्र पर निर्भर है। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का पश्चिम एशियाई देशों को निर्यात 58.8 अरब डॉलर रहा।
शिपिंग कंपनियों से लगातार बातचीत
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे को लेकर जहाजरानी मंत्रालय और शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। सरकार कोशिश कर रही है कि निर्यातकों पर बढ़ते माल ढुलाई खर्च का बोझ कम किया जा सके और व्यापार सामान्य रूप से जारी रहे।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि अंतर-मंत्रालयी समूह हर दिन निर्यातकों से बातचीत कर रहा है, उनकी समस्याएं सुन रहा है और समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बावजूद भारतीय निर्यातकों को किसी तरह की बड़ी आर्थिक मुश्किल का सामना न करना पड़े।



