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सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक हनी ट्रैप केस की गूंज! जनहित याचिका पर आज सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट आज यानी 25 मार्च को कर्नाटक सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री और न्यायाधीशों सहित कई अन्य लोगों को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाने की घटना की जांच के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। इस बाबत याचिकाकर्ता बिनय कुमार सिंह की ओर से वकील बरुण कुमार सिंह ने मामले की तत्काल सुनवाई का उल्लेख किया था ।बता दें कि, धनबाद निवासी याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर याचिका दायर की है। हालिया दिनों में राज्य में यह मुद्दा गहरा गया है। विधानसभा में बैठक के दौरान सहकारिता मंत्री के।एन। राजन्ना ने दावा किया कि विभिन्न दलों के 48 विधायकों को ‘हनीट्रैप’ में फंसाया गया है और यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है, जिसमें कई केंद्रीय मंत्री भी फंस गए हैं।

जानकारी दें कि, बीते 21 मार्च शुक्रवार को भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने कर्नाटक विधानसभा में हंगामा किया था और एक मंत्री तथा अन्य नेताओं से जुड़े कथित ‘हनी ट्रैप’ प्रयास की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की मांग की थी। विपक्षी दलों भाजपा और जद (एस) के सदस्य आसन के करीब आ गए और हाथ में सीडी लेकर नारेबाजी करने लगे, जबकि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने उन्हें उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया था।

इस बाबत सहकारिता मंत्री के. एन. राजन्ना ने तब विधानसभा को सूचित किया था कि उन्हें मोहपाश में फंसाने (हनी ट्रैप) की कोशिश की गई थी और विभिन्न दलों के कम से कम 48 नेता इसी तरह की साजिशों का शिकार हुए हैं। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा था कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो तथा सरकार निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

वहीं सिद्धरमैया ने आश्वासन दिया था कि ‘हनी ट्रैप’ के प्रयास के पीछे जो लोग हैं, उनकी पहचान करने के लिए जांच की जाएगी। वहीं बीते 23 मार्च रविवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा था कि वह उन दावों पर कुछ नहीं बोलेंगे जिनमें कहा गया है कि कर्नाटक के मंत्री और विधायक ‘हनीट्रैप’ रैकेट का शिकार हुए हैं। शिवकुमार ने कहा था कि कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रमुख के तौर पर उन्होंने राजन्ना से बात की और उनसे शिकायत दर्ज कराने को कहा है।

हालांकि, विपक्ष ने मांग की कि सरकार जांच की प्रकृति को स्पष्ट करे और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में जांच पर जोर दिया। मांगों के लिए लगातार जोर डाले जाने पर सिद्धरमैया ने पूछा था कि, ‘‘जब हमने पहले ही उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया है और आपके सुझावों पर विचार करने का वादा किया है, तो आप और क्या चाहते हैं? परमेश्वर और मैं चर्चा करेंगे तथा निर्णय लेंगे।” जैसे ही मुख्यमंत्री ने बजट चर्चा पर अपना जवाब देना शुरू किया था, भाजपा और जद (एस) के सदस्य आसन के करीब आ गए और ‘हनी-ट्रैप सरकार मुर्दाबाद’ और ‘मंत्री राजन्ना को बचाओ’ जैसे नारे लगाने लगे थे।

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