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चंद्र ग्रहण की छाया में होली 2026: बदलेगा होलिका दहन का समय, जानें शास्त्रसम्मत मुहूर्त

Holika Dahan Muhurat: वर्ष 2026 की होली इस बार खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग लेकर आ रही है। होली से एक दिन पहले होने वाले होलिका दहन पर पूर्ण चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहेगा। ऐसे में तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार शास्त्रसम्मत समय का पालन करना विशेष रूप से आवश्यक माना जा रहा है।

ग्रहण के कारण बदलेगा दहन का समय
धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. निगम पाण्डेय के अनुसार वर्ष 2026 में होलिका दहन 2 मार्च (सोमवार) को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी।

इसी दिन दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा। शास्त्रों में ग्रहण काल और सूतक के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसलिए इस वर्ष होलिका दहन ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करना उचित माना गया है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण और भद्रा काल को ध्यान में रखते हुए शाम 06:48 बजे से रात 08:50 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और शुद्धि कर पूजा-अर्चना शुरू करने की सलाह दी गई है।

रंगों की होली यानी धुलेंडी 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व
होलिका दहन की पौराणिक कथा आज भी आस्था और नैतिकता का संदेश देती है। असुर राजा हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद उनके पुत्र प्रह्लाद की अटूट भक्ति विजयी हुई। अग्नि से न जलने के वरदान के बावजूद होलिका दुरुपयोग के कारण भस्म हो गईं, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित रहे। यह पर्व सत्य और भक्ति की विजय का प्रतीक है।

विधि-विधान से करें पूजा
डॉ. पाण्डेय के अनुसार विधिपूर्वक होलिका दहन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। पूजा में गोबर के उपले, सूखी लकड़ी, कलावा, रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, मूंग दाल, बताशे, गेहूं की बालियां और जल का उपयोग किया जाता है।

पूजन के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख कर संकल्प लिया जाता है। होलिका के चारों ओर कलावा लपेटकर जल, फूल और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। नई फसल की बालियों को अग्नि में भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अंत में परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति और मंगलकामना की जाती है।

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