एक शपथ मेरी भी…

पूनम चंद्रवंशी

नई दिल्ली: अब मैं आपको क्या बता सकती हूँ? बहुत खूबसूरत शब्दों में और अपने दिल से सभी भारतीय नागरिकों का ये कहना हैं, आप सब में से करुणा और सहानुभूति इतनी अच्छी तरह से निकलती है कि बयान नहीं की जा सकती।

बस मैं आपको यह बताना चाहती हूं कि जब मेरे भारतीय नागरिक यह कहते हैं कि सरकार बिना किसी पूर्व सूचना के तालाबंदी करने के बारे में गलत थी, या जब आप में से कुछ लोगो ने ये कहा था कि लोग शायद ही दूसरों और उनकी समस्याओं की परवाह नहीं करते हैं हमारे समाज में, तो ये गलत था।

मैंने सोचा इस विषय पर और फिर मुझे लगा कि मैं गलत हो सकती हूं, मेरी धारणा गलत हो सकती है, आप सभी शायद सही हैं क्योंकि अधिकतम आप लोगो में से लोग एक ऐसे पेशे में काम कर रहे हैं, जो हर समय लोगों और समाज के साथ विभिन्न स्तरों और विभिन्न तरीकों से जुड़ा है और उसके अनुसार से व्यवहार करता है और सबसे अच्छा करने के प्रयासों में लगा रहता है।

आपका भी तो देश और समाज उतना ही है जितना मेरा है, जबकि मैं घर पर बैठी हूं और केवल अपने आसपास के लोगों की मदद कर रही हूं और फिर आपको यह बताने की कोशिश कर रही हूं कि आप लोग गलत हैं या पूणतया सही नहीं है।

और फिर मैंने शायद वापस खुद को आयोजित किया उन विचारधाराओं की तरफ और खुद को मानसिक रूप से संगठित किया और सोचा, और अब आप लोगो से कहना चाहती हूं। देखिए, मैं भारत के प्रत्येक नागरिक को बताना चाहती हूं, चाहे आप किसी भी प्रकार के पेशे या नौकरी या व्यवसाय से संबंधित हों। सरकार वही कर रही है जो वे कर सकते हैं, मैं वही कर रही हूं जो मैं कर सकती हूं और 40% लोग भी वहीं कर रहे हैं। जो वह कर सकते है जरूरतमंदों, गरीबों, प्रवासियों आदि के लिए आप महसूस कर रहे है काम कर रहे है पर ये जान लीजिए सरकार नौकरशाहो और विभिन्न विभागों से आने वाले इनपुट द्वारा ही निर्देशित है। इसलिए सरकार की ओर से कोई भी कमी वास्तव में सिस्टम के अंदर या बाहर की कमी, हम सभी की संयुक्त कमी है। क्योंकि हम ही तो सिस्टम में बैठे है कोई दूसरा तो है नहीं, हम आप और हमारे जैसे विभिन्न लोग जो समाज का हिस्सा है उसकी प्रगति का हिस्सा है तो सिर्फ एक आदमी या सिर्फ कुछ आदमी हर उस कारण या वजह के जिम्मेदार नहीं हो सकते जिसका जिम्मेदार आप हम जैसा हर वह नागरिक है जो समाज के निर्माण का हिस्सा है।

देखें, करुणा, प्रेम, स्नेह, ईमानदारी, सम्मान अभी भी जीवित हैं और यदि आप उन्हें देखना चाहते हैं, तो अपने घर से बाहर निकलें और देखें। मैं आपको अपने प्रिय नागरिकों को यह नहीं बता रही हूं कि क्या सही है या क्या गलत है या सरकार या नेताओं की मैं प्रशंसा नहीं करना चाहती हूं या मैं सरकार के किसी धार्मिक या किसी और एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाना चाहती हूं। न तो मैं अपनी प्रशंसा कर रही हूं, न ही मैं किसी विशिष्ट भीड़ की ओर इशारा करना चाहती हूं।

मेरा सिर्फ यह विश्वास है अगर हम सरकार, सिस्टम, नौकरशाहों आदि के साथ मिल कर या कंधे से कंधा मिला कर चलेंगे इस महामारी के वक़्त तो, परिस्थितियों जल्द ही हम सब के काबू में आ जाएगी, यह घातक महामारी हमारे सामने एक वास्तविकता है जिसका हम सभी को मिल के सामना करने की आवश्यकता है।

पूरे विश्व में ही नहीं बल्कि भारत में भी इस महामारी के कारण लोग पीड़ित हैं। यह सच हो सकता है कि संसाधनों की कमी, धन, या भ्रष्टाचार के कारण हमारे देश में अधिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, लेकिन सैकड़ों और हजारों अपने सबसे अच्छे तरीके से आगे बढ़ रहे है इस महामारी से लड़ने के लिए ताकि जैसे भी हो वो उनके भाई और बहन नागरिकों की मदद कर सकें।

मेरे जैसे लोग और आप जैसे अन्य लोग, जिनके पास बहुत कुछ करने की क्षमता और शक्ति है, वे बस शिकायत करने और सरकार की कमियां निकालने या राजनेताओं और नौकरशाहों के ऊपर तर्क करने के लिए बैठे हैं। क्या यही जरूरत है इस समय जबकि देश एक बहुत बड़ी समस्या से गुजर रहा है हमें मिल का इस लड़ाई का सामना करना है, इसको हराना है, देश का सिपाही बन के खड़ा होना है, देश के हित के लिए देशवासियों और देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देना है इस विडंबना से बचना है।

मानवता क्या है?

मानवता को हर हाल में सबसे बुरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, एक साथ मिल के हमें धर्म और जाति को अलग रखते हुए, हमें सरकार और अन्य लोगों की मदद और समर्थन करना चाहिए जो रक्षा की अग्रिम पंक्ति पर हैं, जैसे कि डॉक्टर, पुलिस, सैन्य, सभी सरकारी अधिकारी, ड्राइवर, सफाई कर्मचारी और वे अज्ञात चेहरे आदि जो इस समय दिन रात काम कर रहे है यही मानवता है।

लेकिन हम क्या कर रहे ह़ैं सभी चीजों के लिए अधिकारियों की आलोचना कर रहे हैं, जिन्होंने गलत किया और व्यवस्था को दोष दे रहे है जो नहीं हो पाया। हम इस बारे में टिप्पणी और सुझाव देते हैं कि किस ने क्या किया, या किस ने क्या नहीं किया,क्या कर सकता था, क्या नहीं कर सकता था, यह बेकार है वह अच्छा है और वे कैसे कुछ और कर सकते हैं जो सभी के लिए फायदेमंद होगा।

जबकि वास्तव में हम वास्तव में खुद कुछ भी नहीं कर रहे हैं। बहुत से लोग अपने घरों के आराम को नहीं छोड़ सकते हैं और इस तरह की स्थिति में बाहर नहीं जा सकते हैं, दूसरों की मदद करने के लिए, खुद को जोखिम में नहीं डाल सकते, पर तर्क जरूर देंगे घर में बैठ के। क्या यही हमारा फ़र्ज़ है मानवता के प्रति या देश के प्रति, शायद ही 2% आबादी ऐसा करती है कि अपनी जान की परवाह किए बिना पूरी सावधानी रखते हुए दिन रात ना देखते हुए सिर्फ मानवता और देश और समाज के लिए काम कर रहे है और बाकी प्रतिशत लोग घर बैठ कर कहते है हमें इन पर इतना गर्व है कि आप सभी जो आगे बढ़ कर काम कर रहे हैं और सामने से आगे बढ़ रहे हैं।क्या बस इतना ही काफी है।

सरकार,सरकारी नौकरी पेशा अधिकारी, डॉक्टर, पुलिस विभाग, सेना, एनजीओ सभी इस महामारी से लड़ने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं और हमें भी करना चाहिए। सही और गलत का फैसला करने पर समय बर्बाद करने के बजाय, हमें हर उस जगह जाकर मदद करनी चाहिए जो नियमो के अनुसार सही है इस महामारी में। आइए लड़ते हुए योद्धा लीग का हिस्सा बनने का संकल्प लें और राष्ट्र को इस महामारी से लड़ने में मदद करें,इस पर समय ना बर्बाद करे की कौन क्या कर रहा है और कौन क्या नहीं कर रहा।

मैं यह प्रतिज्ञा लेती हूं
आप भी ले
इस देश के प्रति
इस समाज के प्रति

मेरी शपथ मेरी आन है
मेरा देश मेरी शान है
मिलकर चलना ज्ञान है
हाथ बढ़ाओ यही सम्मान है