
देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, जबकि दक्षिण भारत में बारिश और समुद्री गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग ने अगले सात दिनों का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मैदानी इलाकों तक पहुंचेगा और ठंड का प्रकोप और बढ़ सकता है।
उत्तर भारत में घना कोहरा और शीतलहर का प्रकोप
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आने वाले तीन से चार दिनों तक घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। सुबह और देर रात के समय दृश्यता बेहद कम हो सकती है और कुछ इलाकों में यह 50 मीटर से भी नीचे जाने की आशंका है। ऐसे हालात में रेल, हवाई और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।
तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट संभव
IMD ने बताया है कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। कई क्षेत्रों में दिन के समय भी ठंड का एहसास होगा, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
30-31 जनवरी को सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग के मुताबिक 30 और 31 जनवरी के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से 31 जनवरी से 3 फरवरी के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है।
पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बढ़ेगी ठिठुरन
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अगले 48 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बर्फबारी की संभावना जताई गई है। पहाड़ों से चलने वाली सर्द हवाएं जब मैदानी इलाकों तक पहुंचेंगी, तो ठंड और ज्यादा तीव्र हो जाएगी। कुछ क्षेत्रों में ग्राउंड फ्रॉस्ट की स्थिति बनने की भी आशंका है।
दक्षिण भारत में बारिश और समुद्र में बढ़ी हलचल
दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज उत्तर से अलग बना हुआ है। तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों में अगले एक सप्ताह तक हल्की बारिश की संभावना है। वहीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की चेतावनी जारी की गई है। इसे देखते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।



