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उज्जवला से बड़ी स्कीम लाने की तैयारी में सरकार, देश की 230 ग्रामीण सीटों पर होगा असर

नई दिल्ली: उज्जवला जिस तरह से केंद्र सरकार के लिए 2019 के चुनाव के साथ ही उप्र के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक अमोघ शस्त्र बनी थी और इसने भाजपा को जीत दिलाई थी। उसको ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार आने वाले दिनों में उज्जवला से भी अधिक प्रभावी स्कीम लेकर आने की तैयारी में है। यह लोगों के किचन में गैस और पीएनजी का खर्च लगभग शून्य कर देगी। इसका सबसे अधिक लाभ देश की 230—250 ग्रामीण परिवेश वाले लोकसभा क्षेत्रों में होगा।

इस योजना के तहत सरकार लोगों को ऐसा सौर उर्जा चूल्हा देगी। जो बिना सूर्य में रखे भी चार्ज होता रहेगा। इसे “सूर्य नूतन ” सौर उर्जा चूल्हा नाम दिया गया है। यह छत पर लगे सौर पैनल से एक तार के माध्यम से कनेक्ट होगा। इस चूल्हे पर चार सदस्यों वाले परिवार के लिए तीन समय का खाना बनाया जा सकेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के घर पर इसका परीक्षण किया गया। देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयॅल कॉरपोरेशन के फरीदाबाद स्थित अनुसंधान और विकास विभाग ने इसको विकसित किया है।

यह माना जा रहा है कि इस सौर उर्जा चूल्हा से भाजपा को उसी तरह का लाभ लोकसभा चुनाव 2024 में हो सकता है। जिस तरह से उज्जवला योजना से 2019 के चुनाव में हुआ था। उज्जवला योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2016 में लांच किया था। इसके तहत 50 मिलियन गरीब परिवारों को फ्री एलपीजी कनेक्शन दिया गया है। इसके लिए सरकार ने पहले चरण में 800 बिलियन रूपये आवंटित किये थे।

तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए देश—दुनिया से प्रशस्ति—प्रशंसा हासिल हुई थी। उनकी पहल से देश की करोड़ों महिलाओं को लकड़ी या अन्य धुंआ उत्पन्न करने वाले ईधन से मुक्ति मिली थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सूर्य नूतन योजना उज्जवला का अगला कदम है। उज्जवला योजना में जहां हर बार सिलिंडेर रिफिल कराना होता है। वहीं सूर्य नूतन में इसकी जरूरत नहीं है। एक बार इसे खरीदने पर ही खर्च आएगा। उसके बाद यह बिना देखरेख के अगले दस साल तक चलेगा।

यह कहा जा सकता है कि एक बार खर्च करने के बाद दस साल तक फ्री में खाना बनाया जा सकेगा। जिससे ग्रामीण उपभोक्ता के साथ ही शहरी उपभोक्ता भी इससे लाभांवित होंगे। पहले चरण में लददाख, महाराष्ट्र के अधिक गर्मी वाले इलाके, राजस्थान और देश के ऐसे क्षेत्र जहां सूर्य की रोशनी अधिक समय रहती है।वहां पर इसको उपलब्ध कराया जा सकेगा।

इस अधिकारी ने कहा कि रसोई गैस महंगी होती जा रही है। प्रति सिलेंडर हजार रूपये तक हो गया है। इस वजह से विपक्षी दल उज्जवला स्कीम में रिफिल को लेकर कई बार आंकड़े देते हैं और यह कहते हैं कि इस योजना के सिलेंडर रिफिल होना बंद हो गए हैं। जबकि सूर्य नूतन में चूल्हा पैनल में सोलर उर्जा स्टोर कर लेता है। जिससे रात में भी इस पर खाना बनाया जा सकता है।

यह चूल्हा तार से छत पर रखे पैनल से जुड़ा होता है। जिससे इसे छत पर ले जाकर चार्ज करने की जरूरत नहीं होती है। इस पर एक चार सदस्यीय परिवार के लिए तीन समय का खाना बनाया जा सकता है। यह उर्जा खपत को कम करने के साथ ही रसोई में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला होगा। इस समय इसे देश में 60 स्थानों पर परीक्षण के लिए लगाया गया है। सभी जगह रिजल्ट लाभप्रद है। प्रारंभिक स्तर पर इसकी कीमत 18—30 हजार के बीच होगी। लेकिन उत्पादन बढ़ने पर इसकी कीमत कम होगी। इसके अलावा सरकार इस पर सब्सिडी भी देगी।

जिससे इसकी कीमत 10—12 हजार तक आ जाएगी। पेट्रोलिमय मंत्री हरीदप पुरी ने कहा कि निजी क्षेत्र भी इसके उत्पादन में रूचि दिखाएगा। जिससे कीमत काफी कम होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि इसके सफल होने पर गैस खपत कम होगी। सरकार को एलपीजी पर सब्सिडी से राहत मिलेगी। जिससे हजारों करोड़ रूपये की बचत भी होगी। साथ ही उपभोक्ताओं को सिलेंडर डिलीवरी या गैस सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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