इस मंदिर में छप्पन भोग नहीं, भगवान को खुश करने के लिए चढ़ाई जाती है साधारण ‘लौकी’

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पुत्तूर के पास स्थित श्री सोरकायाला स्वामी मंदिर अपने अनोखे तरीके से भक्तों का ध्यान खींचता है। यहां महादेव को कच्चा दूध और गणेश को लड्डू की तरह, भगवान को प्रसन्न करने के लिए महंगे भोग या फूल नहीं, बल्कि एक साधारण लौकी चढ़ाई जाती है।
1875 का महान संत, जिनकी साधना ने छाया वरदान
यह मंदिर नारायणवरम में स्थित है और इसका संबंध श्री सोरकाया स्वामी से है, जिनका जन्म 1875 के आसपास हुआ था। स्वामी जी दिखने में साधारण थे, लेकिन उनके पास अपार आध्यात्मिक ज्ञान था। स्थानीय लोग उन्हें चमत्कारी संत मानते हैं। कहा जाता है कि नीम की पत्तियों, हल्दी और जड़ी-बूटियों के माध्यम से वे बीमारियों, नकारात्मक ऊर्जा और काले जादू से मुक्ति दिलाते थे।
‘लौकी’ चढ़ाने का रहस्य
तेलुगु में ‘सोरकाया’ का अर्थ है लौकी। स्वामी जी अपने जीवन में हमेशा साधारण लौकी रखते और उसे गरीबों तथा जरूरतमंदों की सेवा में इस्तेमाल करते। उनकी सादगी और सेवा भाव ने यह परंपरा जन्म दी कि इस मंदिर में श्रद्धालु भगवान को प्रसन्न करने के लिए लौकी चढ़ाते हैं।
सच्ची श्रद्धा का प्रतीक
आज भी मंदिर में छत, दीवारों और रेलिंग पर अनगिनत लौकियां लटकी हुई हैं। यह दर्शाता है कि सच्ची आस्था के लिए महंगे भोग की आवश्यकता नहीं होती। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से शरीर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को गहरी आध्यात्मिक शांति मिलती है।
कैसे पहुंचें
- दूरी: तिरुपति से लगभग 38 किलोमीटर, बेंगलुरु से 250 किलोमीटर, हैदराबाद से 585 किलोमीटर।
- नजदीकी शहर: पुत्तूर, सिर्फ 4.8 किलोमीटर दूर।
- यात्रा: तिरुपति पहुंचकर बस या टैक्सी द्वारा सड़क मार्ग से नारायणवरम पहुंचा जा सकता है।



