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भारत का गरबा नृत्य यूनेस्को के अमूर्त धरोहर श्रेणी में हुआ शामिल

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने गुजरात के गरबा लोकनृत्य को अपनी सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया है। यूनेस्को से सांस्कृतिक विरासत का दर्जा हासिल करने वाला गरबा भारत की 15वीं धरोहर है। हाल में यूनेस्‍को ने बोत्‍स्‍वाना में अंतर सरकारी समिति की 18वीं बैठक में गरबा नृत्य को सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने का फैसला किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में गुजरात के गरबा नृत्‍य का नाम शमिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया; “गरबा जीवन, एकता और हमारी गहन परंपराओं का उत्सव है। यूनेस्‍को की अमूर्त विरासत सूची में इसका शिलालेख विश्‍व के समक्ष भारतीय संस्कृति के सौंदर्य को दर्शाता है। यह सम्मान हमें भावी पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए बधाई वैश्विक स्वीकृति।”

गरबा गुजरात का पारंपरिक लोक नृत्य है। इसके बाद ये राजस्थान और देश के बाकी हिस्सों में खेला जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी के घड़े में छेद किए जाते हैं। इसमें दीपक जलाया जाता है। इसके अलावा इसमें चांदी का सिक्का डाला जाता है। इसे दीप गर्भ कहा जाता है। इस दीप गर्भ के आसपास महिलाएं और पुरुष देवी मां को प्रसन्न करने के लिए नृत्य करते हैं। इस दौरान महिलाएं और पुरुष पारंपरिक पोशाक पहनकर नृत्य करते हैं। गरबा खेलने के लिए डांडिया, चुटकी और ताली आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

गरबा खेलते समय मातृशक्ति से संबंधित गीत भी गाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि गरबा नृत्य देवी मां को बहुत प्रिय है। महिलाएं और पुरुष एक समूह बनाकर इस खेल को खेलते हैं। हर साल ये खेल नवरात्रि के दौरान आयोजित किया जाता है।

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