पाकिस्तान में भगवान राम से जुड़ा लौह मंदिर आम जनता के लिए खुला भक्तों में खुशी

नई दिल्ली : भगवान राम के भक्तों के लिए पाकिस्तान से एक बड़ी और खुशखबरी आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित लाहौर किले के ऐतिहासिक लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो गया है। सबसे खास बात यह है कि अब यह मंदिर आम जनता के लिए भगवान राम के भक्तों के लिए पाकिस्तान से एक बड़ी और खुशखबरी आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित लाहौर किले के ऐतिहासिक लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो गया है। सबसे खास बात यह है कि अब यह मंदिर आम जनता के लिए खोल दिया गया है। बता दें कि यह मंदिर भगवान राम के पुत्र लव को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, लव के नाम पर ही इस शहर का नाम लाहौर पड़ा है।
वाल्ड सिटी लाहौर अथॉरिटी ने मंगलवार को जानकारी दी कि उन्होंने लौह मंदिर के साथ-साथ सिख युग के हम्माम और महाराजा रणजीत सिंह के अठदारा पैविलियन का भी संरक्षण और जीर्णोद्धार किया है। डब्ल्यूसीएलए की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने बताया कि इस जीर्णोद्धार अभियान का मुख्य उद्देश्य लाहौर किले की समृद्ध अंतर-सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाना है। यह विरासत यहां के सिख और हिंदू मंदिरों, मुगल मस्जिदों तथा ब्रिटिश काल की संरचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने आगे कहा कि संरक्षण कार्य में आधुनिक और व्यापक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
बता दें कि साल 2025 में एक सिख शोधकर्ता ने लाहौर किले में सिख युग (1799-1849) के दौरान मौजूद लगभग 100 स्मारकों की पहचान की थी और उनके ऐतिहासिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया था। इनमें से करीब 30 स्मारक आज मौजूद नहीं हैं। सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किले और इसके ऐतिहासिक महत्व को बेहतर ढंग से समझाने के लिए डब्ल्यूसीएलए ने अमेरिका स्थित सिख शोधकर्ता डॉ तरुणजीत सिंह बुटालिया को एक टूर गाइडबुक लिखने के लिए नियुक्त किया है। इस पुस्तक का शीर्षक है- सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किला।
पीटीआई से बात करते हुए डॉ बुटालिया ने कहा कि लाहौर किला सिख मानस में गहराई से समाया हुआ एक भावनात्मक स्मारक है, जो लगभग आधी शताब्दी तक सिख साम्राज्य की सत्ता का केंद्र रहा। यह मेरे दिल में बहुत विशेष स्थान रखता है, क्योंकि मेरे पूर्वजों ने ‘उमदत उत तवारीख’ (फारसी दरबारी अभिलेख) के अनुसार सिख दरबार में प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया था।



