झारखंड बजट सत्र का समापन: ‘उन्माद नहीं, अवसर की राजनीति करेगा राज्य’, CM हेमंत सोरेन का संदेश

रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का समापन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबोधन के साथ हुआ, जिसमें विकास, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक संकेत साफ तौर पर उभरकर सामने आए। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए विपक्ष पर परोक्ष निशाना साधा और राज्य के भविष्य के लिए नई दिशा का संदेश दिया।
‘अवसर की राजनीति’ पर जोर, बजट में बड़ा इजाफा
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अब उन्माद की नहीं, अवसर की राजनीति करेगा। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में राज्य का बजट 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसे वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का परिणाम बताते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना का भी जिक्र किया।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय पर फोकस
मुख्यमंत्री ने मंइयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे 50 लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बन रही हैं। बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए 34 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान को सरकार की प्राथमिकता बताया गया।
धार्मिक उग्रता पर चिंता, शिक्षा और नवाचार पर जोर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाज में बढ़ती धार्मिक उग्रता पर चिंता जताई और शिक्षा व नवाचार आधारित विकास मॉडल अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि परंपरा के साथ-साथ आधुनिक सोच और प्रतिभा को बढ़ावा देना जरूरी है, तभी राज्य और देश आगे बढ़ सकते हैं।
ग्रीन एनर्जी और वैश्विक सहयोग की दिशा
मुख्यमंत्री ने ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया और प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को राज्य के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास का हिस्सा बताया।
युवाओं को वैश्विक शिक्षा के अवसर
मुख्यमंत्री ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की बात कही। उन्होंने ऑक्सफोर्ड, वेल्स और कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों को भेजने की योजना का जिक्र किया। साथ ही नॉलेज कॉरिडोर विकसित करने और हर साल 50 छात्रों को यूरोपीय देशों में उच्च शिक्षा के लिए भेजने की बात भी कही।
पुरानी पेंशन योजना और वादों पर कायम रहने का दावा
सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अपने वादों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और नीतियों में स्थिरता बनाए रखी जा रही है।
केंद्र की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी टिप्पणी की और कहा कि मनरेगा से जुड़े फैसलों का असर करोड़ों श्रमिकों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य का केंद्र पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये बकाया है। साथ ही खाड़ी देशों में जारी युद्ध और वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए महंगाई और आमजन पर उसके असर को भी रेखांकित किया।
मजदूरी और सामाजिक योजनाओं पर चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा में बदलाव से राज्य में मजदूरी और सामाजिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई कमजोर पड़ने की आशंका भी जताई और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रस्तावों का भी जिक्र किया।



