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ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने की जस्टिन ट्रूडो को सबसे ज्‍यादा दिक्कत, जानिए क्‍या है वजह

नई दिल्‍ली : कमला हैरिस को पछाड़कर डोनाल्ड ट्रंप ने जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीता तो सबसे ज्यादा धुकधुकी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की बढ़ी होगी. राष्ट्रपति के तौर पर ट्रंप का पहला कार्यकाल इसका गवाह है कि उन्होंने ट्रूडो की सरकार को नाकों चने चबवा दिया थे. लेकिन इस बार ट्रंप के शपथ लेने से पहले ही ट्रूडो के साथ उनके रिश्तों में ये ठंडापन दिखने लगा है. पर ट्रंप को ट्रूडो से दिक्कत क्या है?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए दोनों नेताओं की विचारधारा पर गौर करना जरूरी है. ट्रंप जहां एक तरह कट्टर राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं, जो दक्षिणपंथी हैं और ग्रेट अमेरिका और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन की बातें करते हैं तो वहीं कनाडाई पीएम ट्रूडो की छवि एक लिबरल नेता की है जो खालिस्तानियों के लिए नरम है तो खुली विचारधारा को अधिक तवज्जो देते हैं. ऐसे में रिश्तों में ठंडेपन की एक वजह अलग-अलग विचारधारा का होना भी है.

डोनाल्ड ट्रंप की छवि मुंहफट नेता की है. वह अपने विचारों को लेकर काफी बेबाक हैं और जो उनके मन में होता है वह बिना लेगलपाट के उसे कह देते हैं. यही कारण है कि वो ट्रूडो को डबल फेस शख्स और पागल वामपंथी भी कह चुके हैं. व्हाइट हाउस के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक बार दावा किया था कि ट्रूडो को ट्रंप बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं और वह कई बार अपने स्टाफ को निर्देश भी दे चुके हैं कि ट्रूडो की बातों का खंडन किया जाए. वहीं, ट्रूडो ने इस साल की शुरुआत में संकेत दिया था कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ दूसरी बार तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा.

कुछ महीने पहले ट्रंप ने अपने किताब सेव अमेरिका में ट्रूडो को लेकर कई सनसनीखेज आरोप लगाए थे. इस किताब में ट्रंप ने ट्रूडो को क्यूबा के फिदेल कास्त्रो का बेटा बताया था. इस किताब में ट्रंप ने कहा था कि ट्रूडो की मां किसी तरह से कास्त्रो से जुड़ी हुई थीं. किताब में ट्रंप ने लिखा था कि बहुत सारे लोग कहते हैं कि जस्टिन दरअसल कास्त्रो का बेटा है. वह (ट्रूडो) कहता है कि वह नहीं है लेकिन उसे कैसे पता होगा. हालांकि, ये सिर्फ अफवाहें थी जिनका कई बार खंडन होता रहा है.

2016 में जब ट्रंप ने पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो शुरुआत से ही उनके रिलेशन ट्रूडो से बिगड़ना शुरू हो गए थे. 2018 में कनाडा से अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले स्टील और एल्यूमिनियम पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले का ट्रूडो ने खुलकर विरोध किया था और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर बताया था. कनाडा पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले को ट्रूडो ने इंटरनेशनल मंच पर उठाया था. उन्होंने क्यूबेक में हुए जी7 समिट में इसे कनाडा के लिए अपमानजनक बताया था. इस पर ट्रंप चिढ़ गए थे और उन्होंने ट्रूडो को बेईमान और कमजोर नेता करार दिया था.

डोनाल्ड ट्रंप की सरकार का एक प्रमुख एजेंडा कनाडा के लिए मुश्किल भरा होने वाला है. ट्रंप ने ट्रूडो की सराकर को दो टूक चेतावनी दे दी है कि अगर कनाडा से अमेरिका में दाखिल होने वाले अवैध प्रवासियों पर नकेल नहीं कसी गई तो अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले कनाडा के उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे कनाडा पर बहुत असर पड़ेगा. दरअसल कनाडा का लगभग 75 फीसदी इंपोर्ट अमेरिका में होता है.

2024 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप के भरोसेमंद और करीबी अरबपति एलॉन मस्क ने ट्रूडो पर सीधा निशाना साधा था. उन्होेने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खुलेआम कह दिया था कि अब ट्रूडो की रुखस्ती का समय आ गया है. उनका टाइम अप हो गया है. ऐसे में साफ है कि ट्रंप और ट्रूडो के रिश्तों की ये तल्खी आगे और तल्ख हो सकती है.

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