उत्तर प्रदेशराज्य

कानपुर: गंगा के किनारे मिली 10 फीट लंबी डॉल्फिन, करीब 350 किलो है वजन, इलाके में हड़कंप

कानपुर: कानपुर में गंगा के किनारे एक मृत डॉल्फिन मिलने से हड़कंप मच गया है। इसकी लंबाई करीब 10 फीट और वजन 350 किलो के आसपास बताया जा रहा है। ये डॉल्फिन विलुप्त प्रजाति की बताई जा रही है। फिलहाल वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर डॉल्फिन के शव को कब्जे में ले लिया है और इसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया है।

क्या है पूरा मामला?
घटना जाजमऊ थाना क्षेत्र की है, जहां शुक्रवार की रात स्थानीय नाविकों ने गंगा में एक बड़ी वस्तु को तैरते देखा। नजदीक जाकर देखने पर यह मृत डॉल्फिन निकली। नाविकों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में शव 2-3 दिन पुराना लग रहा है। वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय ने शव को सुरक्षित रखते हुए आगे की कार्रवाई की। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि मामला वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा होने के कारण इसे विभाग को सौंप दिया गया है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि जाजमऊ क्षेत्र में टेनरी उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी सीधे गंगा में गिरता है, जिससे नदी का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो जाता है। इस इलाके में क्रोमियम और अन्य खतरनाक केमिकल्स की मात्रा अधिक होने से जलीय जीवों के लिए खतरा बना रहता है। डॉल्फिन अपनी शिकारी मछलियों के माध्यम से इन विषाक्त पदार्थों को ग्रहण करती है, जो धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI) के सर्वे में भी ऐसे केमिकल्स का डॉल्फिन की खाद्य श्रृंखला में पहुंचना उजागर हुआ है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की पुष्टि हो सकेगी।

गंगा डॉल्फिन, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘जलपरी’ या ‘सूस’ कहा जाता है, नदी की स्वच्छता का प्रमुख संकेतक मानी जाती है। इसकी मौजूदगी ‘नमामि गंगे’ मिशन की सफलता को दर्शाती है। केंद्र सरकार ने इसे 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित घोषित किया है। इनकी औसत आयु 30 वर्ष तक हो सकती है और ये इकोलोकेशन की मदद से शिकार करती हैं।

गंगा में डॉल्फिन की स्थिति
हाल ही में 2024 में हुए सर्वे के आंकड़े, जो मार्च 2025 में जारी किए गए, बताते हैं कि गंगा में डॉल्फिन की कुल संख्या 6324 है। बिजनौर से नरौरा बैराज तक 52 डॉल्फिन दर्ज की गईं, जो 2023 की 50 से थोड़ी बढ़ोतरी दर्शाती है। लेकिन कानपुर जैसे प्रदूषित क्षेत्रों में इनकी संख्या बेहद कम है और मौत के मामले चिंता बढ़ाते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में मेरठ-बुलंदशहर क्षेत्र में चार डॉल्फिन की संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, जिनकी वजह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाई।

कानपुर में गंगा में अत्यधिक प्रदूषण, केमिकल युक्त कृषि अपवाह और औद्योगिक कचरा जलीय जीवन के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेनरियों पर सख्ती और नदी सफाई अभियान को और तेज करने की जरूरत है, वरना यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकती है। वन विभाग ने इस घटना की गहन जांच शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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