
इंफाल : मणिपुर में गैंगरेप का शिकार हुई पीड़िता की दो साल बाद मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक चुराचांदपुर जिला अस्पताल में आदिवासी पीड़िता (Tribal victim) ने आखिरी सांस ली। दो साल तक पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी और इंसाफ का इंतजार कर रही थी। उसके जीते जी उसे इंसाफ नहीं मिल पाया। 18 साल की पीड़िता दो इंफाल के एक ब्यूटी सलून में काम करती थी। 15 मई 2023 को उसे किडनैप कर लिया गया था और इसके बाद उसे बिश्नुपुर जिले के हिलटॉप पर ले जाया गया और वहां गैंगरेप किया गया। घटना के बाद से ही वह इलाज के लिए नागालैंड, असम और मणिपुर के अस्पतालों में चक्कर काट रही थी। 11 जनवरी को चुराचांदपुर के सरकारी अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया।
पीड़िता के परिवार ने बताया कि शारीरिक चोटों के अलावा वह अवसाद से गुजर रही थी। उसने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। पीड़िता की मां ने कहा कि उसे ऐसा लगता था कि उसके जीने का मकसद खत्म हो गया है। ऐसे में समझाने-बुझाने पर भी वह अवसाद से बाहर नहीं आ पा रही थी। परिवार के मुताबिक उसे शाम को करीब 5 बजे एटीएम के पास से चार लोगों ने किडनैप किया था। इसके बाद कार से उसे दूसरी जगह ले जाया गया और मारपीट की गई। परिवार ने बताया कि मैतायी महिलाओं का संगठन मीरा पैबिस और कुछ स्थानीय लोग बाद में वहां पहुंचे और उसकी पटाई की। इसके बाद अरामबाई टेंगोल के कुछ लोगों को बुलाया गया और कहा गया कि इसे खत्म कर दिया जाए। इसके बाद काले कपड़े पहने चार लोगों पीड़िता को एसयूवी में डाला और लेकर चले गए। उनके पास बंदूकें भी थीं। पीड़िता को हिलटॉप पर ले जाया गया और उसके साथ गैंगरेप किया गया।
एफआईआर के मुताबिक चार में से एक शख्स ने उसका रेप नहीं किया था। इस दरिंदगी के बाद बाकी तीन से उसका विवाद हो गया। इसी बीच एक ने एसयूवी मुड़ाने की कोशिश की इससे पीड़िता को गंभीर चोट आई। वह किसी तरह सड़क तक पहुंची। इसके बाद एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने उसकी थाने तक पहुंचने में मदद की। पहले पीड़िता को कांगपोकपी जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद उसे कोहिमा के लिए रेफर कर दिया गया। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है लेकिन अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।



