
यूपी के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार का अवसर, भाषा और कौशल प्रशिक्षण से खुलेगा रास्ता
लखनऊ। अब उत्तर प्रदेश के युवाओं का विदेश में नौकरी का सपना जल्द ही हकीकत में बदल सकता है। प्रदेश सरकार ने भाषा प्रशिक्षण और कौशल विकास को जोड़ते हुए नई पहल की है, जिसके तहत युवा वैश्विक कंपनियों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होंगे। अंग्रेजी के साथ-साथ जापानी, जर्मन, अरबी और फ्रेंच जैसी भाषाओं में प्रशिक्षण देकर प्रदेश के युवा देश-विदेश में बेहतर करियर बनाने में सक्षम होंगे।
युवाओं को वैश्विक स्तर पर तैयार करने के लिए एमओयू
इस पहल के तहत उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन ने ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय और एएफसी इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू किया है। इसका उद्देश्य युवाओं को विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षित करना और उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल अंतर को खत्म करना है, ताकि वे विदेश में रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हों।
समीक्षा बैठक में योजनाओं की प्रगति पर जोर
सोमवार को सेवायोजन निदेशालय के संगम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने योजनाओं की समीक्षा की। बैठक से पहले उन्होंने सेवामित्र योजना के कॉल सेंटर और टोल फ्री नंबर 155330 की व्यवस्था का निरीक्षण किया और सेवा बुकिंग प्रक्रिया को समझा।
विदेशी बाजार में भारतीय श्रमिकों की मांग
मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि जापान, जर्मनी और यूरोप के देशों में भारतीय श्रमिकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में लगभग 6,000 श्रमिक इजरायल में कार्यरत हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं। आने वाले समय में अन्य देशों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खोले जाएंगे।
प्रशिक्षण और कौशल विकास पर फोकस
भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि प्रशिक्षण पूरी तरह विदेशी कंपनियों की जरूरतों के अनुसार होगा। एएफसी इंडिया लिमिटेड ने अपने नेटवर्क के माध्यम से सभी जिलों में कौशल अंतर की पहचान करने और उसे दूर करने की योजना साझा की। प्रमुख सचिव श्रम डा. एमके शन्मुगा सुंदरम ने बताया कि लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में बड़े रोजगार कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिसमें निजी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। स्किल ब्रिज योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त छह युवाओं को कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए।



