उत्तराखंडराज्य

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत मॉक ड्रिल, आपदा में दूरसंचार सेवाओं का प्रबंधन

देहरादून : देहरादून जिले के सुद्धोवाला क्षेत्र में 14 अक्टूबर को दूरसंचार विभाग की उत्तराखंड इकाई एवं एयरटेल द्वारा आपदा के दौरान दूरसंचार सेवाओं की बहाली हेतु तैयारियों का आकलन करने के लिए एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉकड्रिल में आपदा के कारण मोबाइल टावर के बाधित होने की स्थिति में दूरसंचार सेवाओं की समय पर बहाली का परीक्षण किया गया।

आपदा में फंसे लोगों का पता लगाने और चेतावनी संदेश प्रसारित करके जीवन बचाने में दूरसंचार सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आपदा के बाद, दूरसंचार सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर बहाल किया जाना अति आवश्यक है क्योंकि दूरसंचार सेवाएं बचाव, राहत और पुनर्वास उपायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति के अनुसार आपदा के दौरान मोबाइल नेटवर्क के बहाली के लिए त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्निर्माण के लिए व्यापक योजना है। दूरसंचार विभाग ने आपदा के समय मोबाइल नेटवर्क में होने वाले नुकसान को कम करने और उसको बहाल करने हेतु त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) जारी की है। यह मॉक ड्रिल इसी एस.ओ.पी. के तहत आयोजित की गई।

इस मॉक ड्रिल में एयरटेल के एक मोबाइल टॉवर को आपदा या आपात स्थिति के कारण उत्पन्न परिस्थिति का अनुकरण करते हुए बाधित किया गया। आपदा के प्रभाव और क्षति को कम करने के लिए एस.ओ.पी. में परिकल्पित गतिविधियों को एक साथ शुरू किया गया, जिससे कि दूरसंचार सेवाओं को समय पर बहाल किया जा सके। मॉक ड्रिल के दौरान, मोबाइल नेटवर्क की आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं उसकी उपलब्धता की जाँच की गई । आग लगने की स्थिति में मोबाइल टॉवर पर अग्निशमन उपकरणों का परीक्षण एवं पावर बैकअप व्यवस्था की भी जाँच की गई।

इनके अलावा, अन्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ रोमिंग व्यवस्था और 112 आपातकालीन सेवा की उपलब्धता की भी जाँच की गई । मॉक ड्रिल में दूरसंचार विभाग द्वारा जारी एस.ओ.पी. के तहत गठित एयरटेल की फील्ड मेंटेनेंस टीम, साइट टेक्नीशियन टीम, इंफ्रास्ट्रक्चर टीम और कस्टमर एक्सपीरियंस टीम शामिल हुई जिसमें एयरटेल की ओर से श्री चंद्र प्रकाश, श्री अनुज कुमार, मोहम्मद आरिफ, श्री नारायण चरिया मुख्य रूप से शामिल हुए। मॉक ड्रिल का अभ्यास दूरसंचार विभाग की उत्तराखंड इकाई के अधिकारीयों अरुण कुमार वर्मा (डीडीजी, राज्य समन्वय), अभिनव कुमार वर्मा, विशाल श्रीवास्तव और कृष्ण कुमार की निगरानी में किया गया।

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