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मारूति से चलते थे और खुद को हमेशा मिडिल क्‍लास कहते थे मनमोहन सिंह

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्र बनने के बाद भी अपनी मारूति 800 का साथ नहीं छोड़ा। वे उसमें ज्‍यादा कंफर्टेबिल समझते थे। वह खुद को हमेशा मिडिल क्‍लास कहते थे। असीम अरुण पहले पुलिस सेवा मे थे और पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा में रहते थे। अब बीजेपी के नेता हैं, योगी जी की सरकार में मंत्री हैं। उन्‍होंने सरदार मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा-

मैं 2004 से लगभग तीन साल उनका बॉडी गार्ड रहा। एसपीजी में पीएम की सुरक्षा का सबसे अंदरुनी घेरा होता है- क्लोज़ प्रोटेक्शन टीम जिसका नेतृत्व करने का अवसर मुझे मिला था। एआईजी सीपीटी वो व्यक्ति है जो पीएम से कभी भी दूर नहीं रह सकता। यदि एक ही बॉडी गार्ड रह सकता है तो साथ यह बंदा होगा। ऐसे में उनके साथ उनकी परछाई की तरह साथ रहने की जिम्मेदारी थी मेरी।

डॉ साहब की अपनी एक ही कार थी- मारुति 800, जो पीएम हाउस में चमचमाती काली बीएमडब्ल्यू के पीछे खड़ी रहती थी। मनमोहन सिंह जी बार-बार मुझे कहते- असीम, मुझे इस कार में चलना पसंद नहीं, मेरी गड्डी तो यह है (मारुति)। मैं समझाता कि सर यह गाड़ी आपके ऐश्वर्य के लिए नहीं है, इसके सिक्योरिटी फीचर्स ऐसे हैं जिसके लिए एसपीजी ने इसे लिया है। लेकिन जब कारकेड मारुति के सामने से निकलता तो वे हमेशा मन भर उसे देखते। जैसे संकल्प दोहरा रहे हो कि मैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूं और आम आदमी की चिंता करना मेरा काम है। करोड़ों की गाड़ी पीएम की है, मेरी तो यह मारुति है।

सितम्बर, 1932 में गेह (अब पाकिस्तान में) नामक छोटे-से कस्बे में जन्मे मनमोहन सिंह को देश की आजादी के साथ ही हुए बंटवारे के चलते 1947 में भारत आना पड़ा था। अपने जीवन के प्रारम्भिक 12 साल उन्होंने एक ऐसे गांव में गुजारे जहां न बिजली थी, न नल, न स्कूल, न अस्पताल। गांव से दूर स्थित एक उर्दू मीडियम स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की, जिसके लिए उन्हें रोजाना मीलों पैदल चलना पड़ता था। रात को कैरोसिन लैंप की रौशनी में वे पढ़ाई करते। आंखों की रौशनी कम होने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया था कि लैंप के मद्धिम प्रकाश में पढ़ने से उनकी आंखें कमजोर हो गईं। उर्दू उनकी पहली जुबान है। जब भी उन्हें हिन्दी में भाषण देना होता है तो वह उर्दू के ही बड़े अक्षरों में लिखा होता है।

उस दौर में एक अखबार ने लिखा- भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास 1996 मारुति 800 है जो स्पष्ट रूप से उनकी नौकरशाही जड़ों को दर्शाता है। हो सकता है कि उन्‍हें 800 का अधिक उपयोग न करना पड़े क्योंकि वह आमतौर पर आलीशान बुलेट प्रूफ बीएमडब्ल्यू 7-सीरीज़ मे चलते हैं। प्रधानमंत्री की कार की कीमत अब महज 27,500 रुपये है। एक और आश्चर्य की बात यह है कि केंद्रीय रक्षा मंत्री एके एंथोनी, जो अपनी साधारण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं, के पास एक पुरानी कार है। उनकी पत्नी ने सेकेंड हैंड मारुति सुजुकी वैगन आर खरीदी, जिसकी कीमत 136,000 रुपये है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी 2000 फोर्ड आइकॉन के मालिक हैं, जो हमारे प्रधान मंत्री की मारुति 800 से कहीं अधिक महंगी और विशाल है। पुराने आइकॉन की कीमत 1,06,250 रुपये है। एक अन्य मंत्री जिनके पास आम आदमी की कार है, वे ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश हैं जिनके पास मारुति जेन है।

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