उत्तराखंडराज्य

चारधाम आने वाले कई श्रद्धालु बिना दर्शन किए वापस लौटने को मजबूर, जानें पूरे नियम

गोपेश्वर: देवस्थानम बोर्ड द्वारा जारी पास के न होने के कारण चारधाम यात्रा पर आने वाले सैकड़ों तीर्थयात्रियों को धामों के समीप आने के बाद भी बिना दर्शन किए निराश होकर लौटना पड़ रहा है। इन तीर्थयात्रियों के पास कोविड रोधी टीके की दोनों खुराकें लगने का प्रमाण पत्र तथा RT-PCR जांच में कोरोना-मुक्त होने की रिपोर्ट के बावजूद उन्हें धामों के दर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है। चारधाम के नाम से प्रसिद्ध बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शनों के लिए आ रहे सभी श्रद्धालुओं की एक ही शिकायत है कि उन्हें देवस्थानम बोर्ड द्वारा जारी ई-पास होने की अनिवार्यता के बारे में नहीं बताया गया और अब जब वे उसके लिए आवेदन कर रहे हैं तो पोर्टल ही नहीं खुल रहा है।

दिल्ली से आये हौंडा परिवार को गुरुवार को बद्रीनाथ से मात्र 14-15 किलोमीटर पहले पाण्डुकेश्वर में रोक दिया गया जो शुक्रवार को मंदिर के दर्शन किए बिना ही वापस लौट गए। परिवार के मुखिया ने बताया कि ऋषिकेश से लेकर पाण्डुकेश्वर तक उत्तराखंड सरकार द्वारा कई स्थानों पर बनाई गई जांच चौकियों पर कहीं भी उन्हें कोविड संबंधी सभी प्रमाणपत्र होने के कारण नहीं रोका गया। लेकिन पाण्डुकेश्वर में हमें चारधाम देवस्थानम बोर्ड का पास बनाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि जब पास बनाने के लिए वेबसाइट खोलनी चाही तो वह नहीं खुली। उन्होंने कहा कि यदि रास्ते में पहले ही उन्हें देवस्थानम बोर्ड के पास के बारे में जानकारी दे दी जाती, तो पहले ही वह पास बनवा लेते।

चमोली के पुलिस अधीक्षक यशवन्त चौहान ने इस संबंध में कहा कि हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है और हम अपने स्तर पर कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि गुरुवार को प्रधानमंत्री के सलाहकार भास्कर खुल्बे के सामने भी यह मसला उठाया गया था। उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर 18 सितंबर से शुरू हुई चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की अधिकतम दैनिक संख्या निर्धारित कर दी गई है जिसके तहत प्रतिदिन बद्रीनाथ में एक हजार, केदारनाथ में 800, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राज्य सरकार ने बाहरी प्रदेशों के यात्रियों के लिए स्मार्ट सिटी पोर्टल में पंजीकरण के साथ ही चारधाम देवस्थानम बोर्ड के पोर्टल पर भी पंजीकरण अनिवार्य किया है। लेकिन इसका पता उन्हें तीर्थस्थलों के पास पहुंचकर ही लग रहा है जिस कारण हौंडा जैसे श्रद्धालुओं को बिना दर्शन के ही वापस लौटना पड़ रहा है। इस कारण प्रतिदिन 2800 तीर्थयात्रियों के दर्शन की अनुमति के बाद भी इन धामों में आधे से कुछ ही अधिक तीर्थ यात्री पहुंच पा रहे हैं। देवस्थानम बोर्ड द्वारा यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुक्रवार शाम 4 बजे तक कुल 1,717 तीर्थयात्रियों ने धामों के दर्शन किए जो 2800 तीर्थ यात्रियों की अनुमति से कम है।

यात्रा मार्गों पर मौजूद व्यवसायी भी इस बात को लेकर काफी दुखी हैं। चारधाम होटल एसोसिएशन के समन्वयक अतुल शाह ने कहा कि चारधाम देवस्थानम बोर्ड के पंजीकरण पोर्टल पर अक्टूबर तक की बुकिंग हो चुकी है लेकिन मंदिरों में पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों के वापस लौटने से न केवल होटल व्यवसायियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है बल्कि इससे देश में यात्रा को लेकर अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। चमोली के जिलाधिकारी हिमाशु खुराना ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेशों तथा राज्य सरकार द्वारा जारी एसओपी व निर्देशों के आधार पर तीर्थयात्रियों को दर्शन की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

देवस्थानम बोर्ड के पंजीकरण के बिना तीर्थयात्रियों को बद्रीनाथ धाम के दर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि यह उच्चाधिकारियों के स्तर का मामला है और वे ही इस पर निणर्य ले सकते हैं। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि पांडुकेश्वर में देवस्थानम बोर्ड की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि लंबी यात्रा करके यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बिना दर्शनों के वापस लौटने के दुख से बचाया जा सके।

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