लॉकडाउन के डर से प्रवासी मजदूर फिर लौटने लगे गांव, बोले- यहीं रहकर करेंगे काम

लॉकडाउन के डर से प्रवासी मजदूर फिर लौटने लगे गांव, बोले- यहीं रहकर करेंगे काम

छतरपुर: देश में शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर ने उन मजदूरों को फिर दहला दिया है, जो मजदूरी के लिए अपने घर से दूर अन्य प्रदेशों में हैं। लॉकडाउन के डर से यह मजदूर फिर अपने-अपने घरों को ओर लौटने लगे हैं।

गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली की ओर से रोजाना सैकड़ों मजदूर बसों के माध्यम से लौट रहे हैं। दरअसल, पिछली बार कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए 22 मार्च को अचानक सरकार ने लॉकडाउन कर दिया था जो कि 3

1 मई तक चला। इस दौरान प्रवासी मजदूरों को घर लौटने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। उस समय से सबक लेते हुए इस बार लोग उन परेशानी से बचने के लिए पहले ही अपने घर की ओर लौटने लगे हैं।

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लेकिन महानगरों से लौट रहे इन प्रवासी मजदूरों की प्रशासन स्क्रीनिंग नहीं करा रहा है, जिससे एक बार फिर जिले में सामूहिक स्तर पर कोरोना संक्रमण का खतरा सताने लगा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने की वजह से अनलॉक होते ही मजदूर फिर महानगरों की ओर चले गए थे, लेकिन एक बार फिर महानगरों में कोरोना हावी हो रहा है। ऐसे में लोगों में फिर से लॉकडाउन होने की आशंका घर कर गई है।

दूसरे शहर में भूखे मरने से अच्छा, अपने घर रहें

गौरिहार क्षेत्र में कितपुरा गांव का जानकी विश्वकर्मा हरियाणा के रोहतक शहर में परिवार सहित रहकर फर्नीचर बनाने का कार्य करता है। उनके साथ उनका भाई भी अपने परिवार सहित रहकर काम करता है।

वे तीन दिन पहले ही रोहतक शहर से लौटकर अपने गांव कितपुरा पहुंचे हैं। जानकी ने बताया कि रोहतक में इन दिनों कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए काफी सख्ती चल रही है। शाम सात बजते ही वहां कफ्र्यू जैसे हालात निर्मित

हो जाते हैं। इसलिए वहां कभी भी लॉकडाउन हो सकता है, इसलिए अपने गांव लौट आए हैं। अब वे गांव में ही कुछ काम शुरू करेंगे।

कमाई 300 रुपये, मास्क न लगाने पर जुर्माना 2 हजार

बकस्वाहा क्षेत्र वीरों गांव का राजाराम अहिरवार दिल्ली में हम्माली का कार्य करते हैं। रविवार को वे बस द्वारा दिल्ली से छतरपुर बस स्टैंड पहुंचे। राजाराम ने बताया कि वह प्रतिदिन हम्माली कर दिल्ली में 300 रुपये कमाते हैं।

लेकिन अब दिल्ली में फिर से कोरोना के मरीज बढऩे लगे हैं, इसलिए वहां पर बिना मास्क के पकड़े जाने पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगता है। यदि सप्ताह में एक दिन भी पुलिस ने बिना मास्क के पकड़ लिया तो पूरे सप्ताह की कमाई चली जाएगी। इसलिए सोचा अब अपने गांव ही जाकर कुछ करेंगे, कम से कम यहां पर भारी जुर्माना तो नहीं लगेगा।

पहले लॉकडाउन में घर आने में हुए परेशान, इसलिए पहले से आ गए

बिजावर क्षेत्र में रानीताल गांव के किशोरी आदिवासी ने बताया कि वह गुडग़ांव में एक होटल पर खाना बनाने का कार्य करते हैं। वे दो दिन पहले गुडग़ांव से अपने गांव रानीताल लौटकर आए हैं। किशोरी ने बताया कि गुडग़ांव में इन दिनों कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए वहां कभी भी फिर से लॉकडाउन लग जाने की आशंका है।

मार्च माह में अचानक लॉकडाउन लगा तो घर तक आने के लिए ऑटो, बस, डंपर आदि का सहारा लेना पड़ा। इसके बद भी उन्हें और उनके परिवार को काफी परेशान हुई। इसलिए इस बार पहले ही स्थिति को भांपते हुए वे परिवार सहित अपने घर लौट आए हैं।

बाहर से लौट रहे लोगों की कर रहे स्क्रीनिंग

महानगरों से लौट रहे प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग के लिए व्यवस्था की जा रही है। हालांकि हमारी टीमें जिले के गांव-गांव और वार्ड-वार्ड में बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। कोशिश की जा रही है बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग की जाए। ताकि प्रवासी मजदूरों के साथ ही जिले के लोगों को परेशानी न हो।

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