सऊदी अरब के नाबालिग अपराधियों को अब नहीं मिलेगा मृत्युदंड

विवेक ओझा

सऊदी अरब ने नाबालिग अपराधियों के लिए मौत की सज़ा को खत्म किया

नई दिल्ली: 27 अप्रैल को सऊदी अरब के राज्य समर्थित मानवाधिकार आयोग ने नाबालिग अपराधियों के लिए मौत की सज़ा को खत्म करने के बारे में जानकारी दी।  कुछ ही दिन पहले इसी देश ने कोड़े मारने की सज़ा को भी खत्म करने की घोषणा की थी। अब नाबालिग अपराधियों को अधिकतम 10 वर्ष की सज़ा जुवेनाइल डिटेंशन फैसिलिटी में दी जाएगी।

एक के बाद एक कई प्रतिबंधों में ढील देते हुए सऊदी अरब इस्लामी कानून की रूढ़िवादी व्याख्याओं से खुद को दूर रख रहा है। हालांकि देश में अब भी कई लोग इस इस्लामी कानून को मानते हैं। युवराज बिन सलमान का लक्ष्य देश के आधुनिकीकरण, देश में विदेशी निवेश लाने और सऊदी अरब की साख को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने का है।

शाह सलमान के नये शाही आदेश से देश में कम से कम छह लोगों की जान बच जाएगी। ये सभी अल्पसंख्यक शिया समुदाय से हैं जिन्होंने कथित तौर पर अपराध 18 साल से कम उम्र में किए थे।

नाबालिगों के लिये मृत्युदंड की सजा को समाप्त करना सऊदी अरब द्वारा किये गए मानवाधिकार सुधारों की श्रृंखला में एक नवीनतम कदम है। क्राउन प्रिंस सलमान ने सऊदी अरब में कई उदारवादी नीतियां अपनाई हैं। उन्होंने 2018 में देश में महिलाओं को कार चलाने की अनुमति दी थी। इसे सऊदी का एतिहासिक क्षण बताया गया था। उनकी कई कोशिशों को सराहा गया है, लेकिन मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी है। वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद उन पर गंभीर आरोप लगे हैं।2019 में तुर्की के सऊदी दूतावास में खशोगी की हत्या कर दी गई थी।

(लेखक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हैं)