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सरकारी कॉलेजों में 60 प्रतिशत से अधिक पद खाली, ठेके पर नियुक्ति की तैयारी : सैलजा

चंडीगढ़ : पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 60 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं। इन सभी को नियमित भर्ती से भरने की बजाए कुछ पदों को ठेके से भर्ती कर भरने की प्लानिंग की जा रही है, जबकि कुछ पदों पर एडिड कॉलेजों में तैनात नियमित स्टाफ को समायोजित करने की तैयारी है। भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार यह सब सरकारी कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती बंद करने के षड्यंत्र के तहत कर रही है।

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में साल 2019 में सिर्फ 524 पदों पर कुछ ही विषयों में आखिरी बार सहायक प्रोफेसर की भर्ती की गई थी। आधे से अधिक विषय ऐसे बचे हैं, जिनकी वैकेंसी 2016 के बाद से ही नहीं आई हैं। सरकारी कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर के 8137 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 4738 पद रिक्त हैं। निदेशक उच्चतर शिक्षा ने 1535 रिक्त पदों को भरने के लिए 02 सितंबर 2022 को आग्रह पत्र एचपीएससी को भेजा, लेकिन यूजीसी की गाइडलाइन में संशोधन का हवाला देकर भर्ती को वापिस मंगा लिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक साल बीतने के बाद भी उक्त नियमों में संशोधन की प्रक्रिया को विभाग पूरा नहीं कर पाया है। पक्की भर्ती करने से बचने लिए गठबंधन सरकार प्रदेश के एडेड कॉलेजों के पूर्ण समायोजन की बजाए इनमें मौजूद नियमित स्टाफ को सरकारी कॉलेजों में मर्ज़ करने जा रही है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश के 97 एडेड कॉलेज में टीचिंग स्टाफ के 2932 व नॉन टीचिंग स्टाफ के 1664 पद हैं। इनमें 2 लाख के आसपास छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन में स्टाफ नियमित व सरकारी होने के कारण ही इन्हें राज्य व केंद्र सरकार से अनुदान मिलता है, ताकि विद्यार्थी सस्ती व अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त कर सकें। गठबंधन सरकार की योजना सिरे चढ़ गई तो फिर एडेड कॉलेज पूरी तरह निजी हो जाएंगे, क्योंकि सरकार स्टाफ के समायोजन के साथ ही एडेड कॉलेज से इन पदों को ही खत्म कर दिया जाएगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे एक तरफ तो एडेड कॉलेजों में स्थायी पद खत्म होंगे और दूसरी तरफ इनके जाने से करीब इतने ही पद सरकारी कॉलेजों में भर जाएंगे। इससे सहायक प्रोफेसर की नौकरी के लिए तैयारी कर रहे बेरोजगार अभ्यर्थियों पर दोहरी मार पड़ेगी। उनके लिए एडेड कॉलेज में नियुक्ति का रास्ता खत्म होने के साथ ही सरकारी कॉलेजों में भी इन पदों पर तैनाती का दरवाजा बंद हो जाएगा। वहीं, इस मर्जर के बाद सरकारी वित्त पोषित ये कॉलेज पूर्णतः निजी हो जाएंगे, जिससे लाखों विद्यार्थी महंगी शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर होंगे व ग्रामीण-गरीब तबका उच्च शिक्षा से ही बाहर हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस मर्जर के बाद खाली 1000-1500 पदों को हरियाणा कौशल रोजगार योजना के तहत ठेके पर भरने का प्लान गठबंधन सरकार बना रही है। जिसमें अनुसूचित व पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान भी नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश सरकार सरकारी कॉलेजों में लगभग 2000 एक्सटेंशन लेक्चरर बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया, बिना आरक्षण के तैनात कर चुकी है।

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