राम कुमार सिंह

होली विशेष: भारतीय राजनीति में कई ऐसे क्षण आते हैं जब कठोर निर्णयों और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच एक बेटे और उसकी मॉ बिशना देवी की कोमल तस्वीर उभरती है। जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी माताजी के साथ होली के हर्षोल्लास के साथ मॉ के आशीर्वाद के रंगों से सराबोर दिखाई देते हैं, तो वहीं पूर्व में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी माँ हीराबेन के साथ तस्वीरें भी समय-समय पर भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनती रही हैं। दोनों ही प्रसंग हमें यह याद दिलाते हैं कि सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति भी सबसे पहले एक पुत्र हैं।

संस्कारों की नींव
सीएम धामी की सार्वजनिक छवि एक ऊर्जावान, जमीनी नेता की रही है। उनके जीवन में पारिवारिक संस्कारों की भूमिका अक्सर उनके वक्तव्यों और व्यवहार में झलकती है। माँ के साथ होली जैसे पारिवारिक उत्सव का दृश्य बताता है कि राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच भी परिवार और परंपरा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।
इसी तरह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अवसरों पर अपनी माँ हीराबेन के चरण स्पर्श करते हुए तस्वीरें साझा कीं। साधारण परिवेश में पली-बढ़ी हीराबेन का जीवन सादगी और त्याग का प्रतीक रहा। मोदी स्वयं कई बार कह चुके हैं कि उनकी माँ ने कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और परिश्रम का पाठ पढ़ाया।

सादगी और शक्ति का संगम
दोनों नेताओं की माताएँ साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं, लेकिन उनके बेटों ने असाधारण ऊँचाइयाँ हासिल कीं। यह तुलना किसी राजनीतिक विमर्श से अधिक उस भारतीय पारिवारिक संरचना की ओर संकेत करती है जहाँ माँ केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि मूल्यों की पहली पाठशाला होती है।
सीएम धामी की माँ का आशीर्वाद हो या नरेंद्र मोदी की माँ का स्नेह,दोनों ही प्रसंगों में एक समान भाव सादगी, त्याग और अपने बेटे की सफलता में मौन संतोष दिखाई देता हैं।

सार्वजनिक जीवन में निजी भावनाएँ
राजनीति को अक्सर कठोरता और रणनीति से जोड़ा जाता है, लेकिन ऐसे दृश्य मानवीय पक्ष को उजागर करते हैं। जब एक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री अपनी माँ के साथ दिखाई देते है, तो वह छवि जनता के साथ भावनात्मक संबंध भी स्थापित करती है। यह संदेश जाता है कि जिम्मेदारियों के विशाल दायरे के बावजूद, पारिवारिक मूल्य और मातृभक्ति भारतीय नेतृत्व की आत्मा में रची-बसी है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,दो अलग पीढ़ियों और भूमिकाओं के नेता,लेकिन दोनों के जीवन में माँ का स्थान समान रूप से सर्वोच्च है। यह तुलना किसी पद या शक्ति की नहीं, बल्कि उस अटूट रिश्ते की है जो हर सफलता के पीछे खड़ा रहता है।आख़िरकार, राजनीति बदल सकती है, पद बदल सकते हैं, लेकिन माँ का आशीर्वाद अडिग-अमूल्य बना रहता है।
(लेखक दस्तक टाइम्स से संपादक हैं)






