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वैश्विक निवेश में पांच साल में करीब 480% का उछाल; भारत तेजी से उभरता खिलाड़ी

नई दिल्ली : पिछले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे तेजी से बढ़ता सेक्टर बनकर उभरा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 और सीबी इनसाइट्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच एआई में वैश्विक निजी और सरकारी निवेश करीब 480% बढ़कर 335 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान अमेरिका और चीन सबसे बड़े निवेशक बने रहे, जबकि भारत, यूके, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश तेजी से अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स के अनुसार 2020 में वैश्विक एआई निवेश लगभग 58 बिलियन डॉलर था, जो 2024 के अंत तक बढ़कर 335 बिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया। इसमें निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल, कॉरपोरेट आरएंडडी और सरकारी फंडिंग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 2023 और 2024 में जनरेटिव एआई के उभार के बाद निवेश की रफ्तार अचानक तेज हुई जब ओपनएआई, एन्थ्रॉपिक, गूगल डीपमाइंड और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों में अरबों डॉलर झोंके गए।

सीबी इनसाइट्स और पिचबुक के अनुसार, अकेले 2024 में ही जनरेटिव एआई स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर 70 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग मिली, जो 2020 की कुल एआई फंडिंग से भी ज्यादा थी। रिपोर्ट के मुताबिक कुल वैश्विक एआई निवेश का लगभग 55% हिस्सा अमेरिका के खाते में गया। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन और एनवीडिया जैसी कंपनियों की भारी आरएंडडी खर्च ने अमेरिका की बढ़त को और मजबूत किया। चीन करीब 20% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। भारत निवेश के मामले में तीसरे सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभरा। यूएनसीटीएडी व पिचबुक के अनुसार 2020 से 2024 के बीच भारत में एआई निवेश 600% बढ़ा, हालांकि कुल राशि अभी अमेरिका और चीन से काफी कम है।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2025 के मुताबिक कुल नए निवेश का लगभग 40% हिस्सा जनरेटिव एआई से जुड़ी कंपनियों में गया। चैटबॉट, इमेज और वीडियो जनरेशन, हेल्थकेयर एआई और ऑटोमेशन टूल्स ने निवेशकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। माइक्रोसॉफ्ट का ओपनएआई में 13 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश और अमेजन-गूगल की क्लाउड आधारित एआई रणनीतियां इस ट्रेंड की बड़ी मिसाल हैं।

यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट के अनुसार एआई निवेश अब केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक और सामरिक ताकत का भी संकेतक बन चुका है। अमेरिका और चीन इसे भविष्य की उत्पादकता, सैन्य क्षमता और वैश्विक प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भारत और यूरोप इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के औजार के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो 2030 तक वैश्विक एआई बाजार का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है।

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