
नई दिल्ली : मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आवश्यक “नेशनल एलिजिबिलिटी” कम एंट्रेंस टेस्ट “NEET” का आयोजन अब साल में एक बार ही किया जाएगा| मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिश के बाद यह फैसला लिया है| दरअसल इससे पहले मंत्रालय ने नीटे और जेईई को साल में दो बार और कंप्यूटर बेस्ड मोड में करवाने का फैसला किया था| “NEET” के साल में एक बार होने के साथ ही परीक्षा का आयोजन भी पेन और पेपर के माध्यम से करवाया जाएगा| हालांकि कुछ दिन पहले ही मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था, कि पहले साल में उम्मीदवार पेन और पेपर का इस्तेमाल कर सकेंगे और पेपर ऑनलाइन नहीं होंगे जबकि पेपर कंप्यूटर पर अपलोड किए जाएंगे|
वहीं जेईई परीक्षा का आयोजन नए पैटर्न के आधार पर होगा,जिसमें परीक्षा का आयोजन साल में दो बार होगा| वहीं इन परीक्षाओं का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से किया जाएगा| बता दें कि, एनटीए की ओर से सिर्फ जेईई मेंस करवाई जाएगी, जबकि जेईई एडवांस परीक्षा का आयोजन आईआईटी की ओर से ही किया जाएगा| नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है| एनटीए के अनुसार यूजीसी नेट की परीक्षा का आयोजन 9 से 23 दिसंबर के बीच होगी, जबकि “जेईई मेंस-1” की परीक्षा 6 जनवरी से 20 जनवरी 2019 के बीच, “जेईई मेंस-2” की परीक्षा 6 अप्रैल से 20 अप्रैल 2019 के बीच और नीट की परीक्षा 5 मई को होगी| पिछले महीने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी,कि नवगठित नेशनल टेस्टिंग एजेंसी “NTA” साल में दो बार राष्ट्रीय योग्यता सह-प्रवेश परीक्षा के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य का आयोजन करेगी| उन्होंने घोषणा की थी कि “NTA” द्वारा ली जाने वाली सारी परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी| स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय को खत लिखकर साल में दो बार नीट परीक्षा कराने को लेकर चिंता जताई, क्योंकि इस तरह के परीक्षा कार्यक्रम से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है| ग्रामीण इलाके में रहने वाले छात्रों को लेकर भी चिंता प्रकट की गई कि सिर्फ ऑनलाइन मोड में परीक्षा होने से उन्हें नुकसान हो सकता है|