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कुत्ते का काटना ही नहीं, चाटना भी पड़ सकता है भारी; लार से फैल सकता है खतरनाक संक्रमण

नई दिल्ली। देशभर में कुत्तों को लेकर अक्सर बहस देखने को मिलती है। एक तरफ पेट लवर्स आवारा कुत्तों की सुरक्षा और देखभाल की बात करते हैं, वहीं विशेषज्ञ लोगों को इनके संपर्क में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कुत्ते का काटना ही नहीं, बल्कि उसका चाटना भी कई बार गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में कुत्ते की लार के संपर्क में आने से भी खतरनाक संक्रमण फैल सकता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कुत्ते के चाटने से लोगों की हालत गंभीर हो गई। हाल ही में लंदन में रहने वाली एक महिला को अपनी चोट पर कुत्ते के चाटने के बाद गंभीर संक्रमण हो गया था, जिसके कारण उसे सेप्सिस हो गया और इलाज के दौरान उसके हाथ-पैर तक काटने पड़े।

रेबीज से हर साल हजारों मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत रेबीज संक्रमण के कारण होती है। यह संक्रमण अधिकतर कुत्ते के काटने से फैलता है, लेकिन कई बार संक्रमित कुत्ते की लार के संपर्क में आने से भी इसका खतरा पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक चाहे कुत्ता पालतू हो या आवारा, यदि काटने की घटना होती है तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य होता है। यदि समय रहते टीका नहीं लगाया गया तो वायरस शरीर में फैल सकता है और यह दिमाग, नर्वस सिस्टम तथा हृदय पर गंभीर असर डाल सकता है, जिससे जान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

कुत्ते के चाटने से कैसे फैलता है संक्रमण

डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते की लार में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस मौजूद हो सकते हैं। यदि कोई संक्रमित कुत्ता किसी व्यक्ति की खुली चोट, कट, खरोंच या आंख, नाक और मुंह के आसपास चाटता है, तो उसकी लार के जरिए संक्रमण शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है।

यह संक्रमण धीरे-धीरे नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और गंभीर स्थिति में रेबीज जैसी बीमारी का कारण बन सकता है। इसके अलावा कुत्ते की लार से बैक्टीरियल संक्रमण भी फैल सकता है, जो आगे चलकर सेप्सिस जैसी खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।

सेप्सिस के प्रमुख लक्षण

सेप्सिस एक गंभीर संक्रमण है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार या शरीर का तापमान बहुत कम होना, तेज धड़कन, सांस लेने में दिक्कत, पेशाब कम आना, अत्यधिक थकान, त्वचा पर लाल या गहरे धब्बे दिखाई देना शामिल हैं।

इसके अलावा लो ब्लड प्रेशर, बेहोशी, ठंड लगना और कांपना, तेज दर्द या बेचैनी महसूस होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है।

कुत्तों के संपर्क में बरतें सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शरीर पर कहीं भी चोट, कट या खरोंच हो तो कुत्तों को उस जगह के संपर्क में आने से रोकना चाहिए। घर में पालतू कुत्ता होने पर भी उसे चेहरे, आंख, नाक और मुंह के पास आने से बचाना चाहिए।

इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने कुत्ते को छुआ है तो बाद में हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। सावधानी बरतने और समय पर इलाज कराने से ऐसे संक्रमणों से बचाव संभव है।

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