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पॉलिटिक्स राजभवनों की- मुंबई से कोलकाता तक

ज्ञानेन्द्र शर्मा

प्रसंगवश

स्तम्भ: पिछली 9 अप्रैल को महाराष्ट्र के मंत्रिमण्डल ने सर्वसम्मति से निर्णय किया था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राज्य की विधान परिषद में सदस्य के रूप में नामांकित करने की अनुशंसा राज्यपाल से की जाय।उसी दिन यह सिफारिश महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को, जो उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, भेज दी गई। पर मानो गवर्नर साहब ने कसम खा रखी थी सो उन्होंने पूरे अप्रैल यह सिफारिश पलटकर भी नहीं देखी। लोगों ने बहुत हाय तौबा मचाई लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। उधर सत्तासीनों की दिल की घड़कनें बढ़ती जा रही थीं क्योंकि महाराष्ट्र के पूरे सत्तारूढ़ कुनबे को डर लग रहा था कि कहीं मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हटना न पड़े। दरअसल ठाकरे ने 28 नवम्बर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और जब वे राज्य की इस सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठे थे तब वे विधानमण्डल के दोनों में से किसी के सदस्य नहीं थे और इस तरह छह महीने के अंदर अंदर उन्हें किसी एक सदन का सदस्य बन जाना संवैधानिकतः अनिवार्य था। 6 महीने की यह मियाद इस महीने की 27 तारीख को खत्म हो रही थी।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधान परिषद का सदस्य बनाने को तैयार नहीं थे। क्यों, यह किसी को पता नहीं था। उन्होंने इसकी वजह का किसी को संकेत भी नहीं दिया था, इसलिए एक ही कयास लगाया जा रहा था और वह यह कि हो न हो, यह सब केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की पालिटिक्स का खेल है। उद्धव ठाकरे को पटकनी देकर और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करके, उनसे वह उस पराजय का बदला लेना चाहती होगी जिस पराजय का मुॅह उसे विधानसभा के चुनाव के बाद पिछले साल नवम्बर में देखना पड़ा था।

सत्तारूढ़ गठबंधन ने कई बार राजभवन तक दौड़ लगाई लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी क्योंकि कोश्यारी जी संविधान के उस अनुच्छेद 163/1/ की तरफ देखना भी नहीं चाहते थे जिसमें कहा गया है कि

उद्धव ठाकरे

राज्यपाल के लिए मंत्रिमण्डल की सिफारिश मानना अनिवार्य है। हॉ इतना अवश्य था कि उनके लिए ऐसे किसी व्यक्ति को एमएलसी नामांकित करना अनिवार्य शर्त नहीं है जो साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा का विशेष ज्ञान अथवा व्यवहारिक ज्ञान न रखता हो। लेकिन श्री ठाकरे एक मंजे हुए वन्यजीव फोटोग्राफर हैं और राजनीति में सक्रिय रहे हैं जो एक तरह से समाज सेवा ही मानी जाती है। इस तरह वे शर्तें पूरी करते थे।

रंजन गोगोई

यह बात भी भुला दी गई कि राष्ट्रपति ने केन्द्र की सिफारिश पर सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश -प्राप्त प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा में आनन—फानन नामांकित कर दिया था जबकि वे साहित्य, विज्ञान, आर्ट, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा जैसी कोई योग्यता नहीं रखते थे। लेकिन राज्यपाल को पॉलिटिक्स करनी थी सो उन्होंने की, हॉ, इस बात का ध्यान उन्होंने जरूर रखा कि तमाम प्रदेशों के भाजपाई राज्यपालों की तरह वे भी अपने राजभवन को केन्द्र की सत्तारूढ़ पार्टी का विधिवत ‘विस्तारित पटल यानी एक्सटेंशन काउंटर’ बनाए रखें। जब तमाम राज्यपाल यह मंत्र भूले हुए हैं कि भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए अपने कई चुनाव घोषणापत्रों में बाकायदा जनता से यह वादा किया था कि वे राजभवनों को केन्द्र की सत्तारूढ़ पार्टी का विस्तारित पटल नहीं बनने देंगे, तो वे ही उसे याद क्यों रर्खें- महाराष्ट्र के राजभवन को ही अपवाद क्यों रहने दें!

और रही सही कमी उस समय पूरी हो गई कि उद्धव ठाकरे ने इस पूरे मामले को प्रधानमंत्री के सामने रखा तो तुंरत ही राजभवन से केन्द्रीय चुनाव आयोग के पास यह सिफारिश भेज दी गई कि विधानपरिषद की 9 रिक्त सीटों के लिए चुनाव करा लिए जाएं– इसके बावजूद ऐसे ही दूसरे कई चुनाव कैरोना वायरस के चलते स्थगित हो चुके हैं। अब 21 मई को ये चुनाव होने वाले हैं और इनके रास्ते श्री ठाकरे विधान परिषद की सदस्यता प्राप्त कर अपनी कुर्सी बचा सकते हैं।

कोलकता का परिदृश्य

ममता बनर्जी

मुम्बई में तो यह अब हुआ। कोलकता में एक अरसे से ऐसे ही घमासान हो रहे हैं। मुम्बई में पिछले साल नवम्बर में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसके बाद भाजपा विपक्ष में आ गई थी जबकि बंगाल में इस साल के नवम्बर में चुनाव प्रस्तावित हैं और भाजपा ऐसा कोई वाण अपने तरकश में रोककर नहीं रखना चाहती जो ममता बनर्जी की पार्टी को चुनाव में हराने के काम न आए।

राज्यपाल जगदीप धनगढ़

वहां बार—बार राज्यपाल जगदीप धनगढ़ कुछ न कुछ करतब दिखाकर संविधान जानकारों को चौंकाते रहते हैं। धनगढ़ जनता दल के पूर्व सांसद हैं। उनकी मदद को दिल्ली से डोर बराबर खींची जाती रहती है। कई बार तो राज्यपाल वहॉ कीे जनता द्वारा निर्वाचित मुख्यमंत्री को धमकाते भी रहते हैं।

और सबसे ताजा किस्सा सामने आया कैरोना की जॉच पड़ताल के लिए बंगाल भेजी गई केन्द्रीय टीम का। बंगाल के मुख्य सचिव ने बाकायदा कहा कि केन्द्र की टीम राज्य में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस को साथ लेकर घूम रही थी।

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