
भोपाल । मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव हो चुके हैं मगर अब प्रमुख पदों पर कब्जा करने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा ने नगरीय निकाय और जिला पंचायत के लिए प्रभारियों की भी तैनाती कर दी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में चिंतन मंथन का दौर जारी है। राज्य में पंचायत के चुनाव गैर दलीय आधार पर हुए हैं, तो वहीं नगरीय निकाय के चुनाव दलीय आधार पर। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की है। महापौर के 16 में से नौ पर भाजपा जीती है, तो दूसरी ओर पांच पर कांग्रेस और एक पर आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। इसके अलावा नगर पालिका और नगर परिषद में भाजपा का कब्जा है।
आने वाले दिनों में नगर निगम के अध्यक्ष के अलावा नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव होना है, साथ ही नेता प्रतिपक्ष का भी चयन किया जाना है। भाजपा ने नगरीय निकाय चुनाव के लिए 16 नगर निगम के अलावा नगर परिषद, नगर पालिका और सभी जिला पंचायत के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। दूसरी ओर कांग्रेस भी इन चुनावों को लेकर गंभीर है और रणनीति पर अमल हो रहा है।
राज्य में पंचायत के चुनाव भले ही गैर दलीय आधार पर हुए हैं मगर कांग्रेस और भाजपा अपने समर्थकों के आधार पर गांव की सरकार पर भी कब्जा करने की तैयारी में है। जिला पंचायत हो या जनपद पंचायत दोनों ही स्थान राजनीतिक दलों के लिए अहम है और वे इन पर किसी भी सूरत में कब्जा जमाने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते। यही कारण है कि कई स्थानों पर तनाव और विवाद की स्थितियां की बन रही हैं।