उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी में 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत की तैयारी, प्रीपेड मीटर फिर हो सकते हैं पोस्टपेड

लखनऊ में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म करने की अधिसूचना जारी होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं के मीटर दोबारा पोस्टपेड मोड में किए जाने की मांग तेज हो गई है।

उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को लेकर विद्युत नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद ने मांग की है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड किए गए 70 लाख से अधिक स्मार्ट मीटरों को तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड मोड में बदला जाए।

पावर कारपोरेशन और केस्को से सात दिन में जवाब तलब
इस बीच आयोग ने विद्युत अधिनियम 2003 के उल्लंघन के मामले में पावर कारपोरेशन और केस्को से सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई परिषद द्वारा कानपुर में बिजली दर जनसुनवाई के दौरान दाखिल अवमानना याचिका के आधार पर की गई है।

अधिसूचना के बाद भी लागू है प्रीपेड व्यवस्था
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि केंद्रीय अधिसूचना जारी होने के बावजूद प्रदेश में अब तक प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई है। नए कनेक्शनों में भी प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो केंद्र सरकार के निर्देशों की अवहेलना है।

70 लाख से ज्यादा मीटर पोस्टपेड करने की मांग
परिषद ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर स्पष्ट मांग रखी है कि जिन उपभोक्ताओं के मीटर उनकी सहमति के बिना प्रीपेड किए गए हैं, उन्हें तत्काल पोस्टपेड मोड में बदला जाए। इससे करीब 70 लाख उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
परिषद का कहना है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर को प्रीपेड में बदलना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसे में बिजली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और नियमों का पालन सुनिश्चित हो।

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