हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, GST कलेक्शन में भारी गिरावट; CM सुक्खू ने केंद्र से मांगी मदद

शिमला। आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रही हिमाचल प्रदेश सरकार की चिंताएं और बढ़ गई हैं। संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट में राज्य की कमजोर होती आर्थिक स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल को जीएसटी के तहत मिलने वाली राशि में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे राज्य की वित्तीय सेहत पर सीधा असर पड़ा है।
GST से मिलने वाली रकम में बड़ा अंतर
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में हिमाचल प्रदेश को जीएसटी से केवल 6,824 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। जबकि वर्ष 2023-24 में राज्य को 9,956 करोड़ रुपये और 2024-25 में 10,824 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि मिली थी। इस तेज गिरावट ने प्रदेश सरकार की राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया मामला
जीएसटी में आई कमी को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष राज्य की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र के सामने जीएसटी कलेक्शन में गिरावट को प्रमुखता से रखा, लेकिन अब तक किसी तरह की ठोस राहत नहीं मिल पाई है।
प्रति व्यक्ति आय बढ़ी, लेकिन विकास दर घटी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में तो बढ़ोतरी हुई है, लेकिन राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,50,290 रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 2,56,137 रुपये हो गई। वहीं, राज्य घरेलू उत्पाद का प्रतिशत पहले 10.91 था, जो घटकर पिछले वर्ष 9.12 प्रतिशत रह गया।
GSDP के आंकड़ों में भी गिरावट का संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार अगस्त 2025 के आधार पर वर्ष 2024-25 में हिमाचल का राज्य घरेलू उत्पाद 1,92,794 करोड़ रुपये रहा, जिसकी वृद्धि दर 9.66 प्रतिशत रही। जबकि वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 1,08,359 करोड़ रुपये था और तब वृद्धि दर 11.88 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
बढ़ते राजस्व घाटे पर भी जताई गई चिंता
रिपोर्ट में प्रदेश के बढ़ते राजस्व घाटे का भी उल्लेख किया गया है। देश के 26 राज्यों के तुलनात्मक आंकड़ों में पहाड़ी राज्यों के बीच हिमाचल की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई गई है, जिससे आने वाले समय में राज्य की वित्तीय चुनौतियां और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
मुद्रास्फीति में आई कमी, लेकिन राहत सीमित
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में मुद्रास्फीति दर में गिरावट देखी गई है। वर्ष 2022-23 में यह 4.51 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 5.04 प्रतिशत हो गई थी। हालांकि 2024-25 में यह घटकर 4.04 प्रतिशत रही। वहीं 2025-26 के आंशिक आंकड़ों में मुद्रास्फीति 2.17 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े नहीं हैं।
केंद्र के सामने तीन साल का पूरा पक्ष रख रही सरकार
प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष पिछले तीन वर्षों के आर्थिक आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा रही है। सरकार का तर्क है कि लगातार घटते राजस्व और जीएसटी में कमी के चलते राज्य को विशेष सहायता की आवश्यकता है।



