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पंजाब को पिछली सरकार ने लूटा, हमें 3 लाख करोड़ का कर्ज विरासत में मिला: आम आदमी पार्टी

चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पत्र का जिक्र करते हुए पंजाब के राज्यपाल को राज्य पर बढ़े कर्ज और बढ़े राजस्व का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पंजाब की मान सरकार ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को पत्र लिखकर ग्रामीण विकास निधि का मामला केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के समक्ष उठाने के लिए कहा था जिसके जवाब में पुरोहित ने मान सरकार से राज्य पर बढ़े कर्ज के बारे में पूछा। मंगलवार को भगवंत मान ने राज्यपाल को कर्ज और राजस्व वृद्धि के सभी विवरणों के साथ एक पत्र लिखा और एक बार फिर उन्हें पंजाब के हित में कार्य करने और आरडीएफ जारी करने के लिए केन्द्र सरकार से अपील करने को कहा।

पत्र का जिक्र करते हुए ‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि हमारी सरकार को पंजाब की पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकार से 3 लाख करोड़ का कर्ज विरासत में मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति के लिए यह कर्ज और उनका भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि उस कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए मान सरकार ने 27,016 करोड़ का कर्ज लिया।

कंग ने कहा कि 10,208 करोड़ नए ऋण पूंजीगत व्यय पर खर्च किए गए। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बेलआउट पैकेज हैं जो मान सरकार ने पनसप(PUNSUP), और पंजाब राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक(PSCADB) एवं अन्य विभागों को दिए। कंग ने कहा कि ये सभी विभाग बहुत महत्वपूर्ण हैं और पिछली सरकारों ने इनकी उपेक्षा की थी। इसका सीधा असर पंजाब के ग्रामीण इलाकों, मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ये सभी विभाग गहरे संकट में थे और मान सरकार ने बेलआउट पैकेजों के माध्यम से उन्हें बनाए रखा। इसलिए पनसप के लिए 350 करोड़, पीएससीएडीबी के लिए 798 करोड़ और आरडीएफ के लिए 845 करोड़ दिए।

इनके अलावा 2017 से मार्च 2022 तक बिजली सब्सिडी का बकाया चुकाने और गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए मान सरकार ने 2,556 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 4000 करोड़ का सिंकिंग फंड निवेश भी किया गया और गन्ना किसानों के लिए करीब 1000 करोड रुपए दिए। कंग ने कहा कि इसके कारण पंजाब पर 48,530 करोड़ का कर्ज बढ़ गया, न कि 50,000 करोड़, जैसा कि गवर्नर ने बताया है। लेकिन उल्लेखनीय है कि नए कर्ज के लिए भी पिछली सरकारें और उनका कर्ज जिम्मेदार है।

कंग ने कहा कि साथ ही गवर्नर को इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि मान सरकार के गठन के बाद से राजस्व में भी काफी वृद्धि हुई है। जीएसटी से राजस्व में 2021-22 (कांग्रेस सरकार के दौरान) की तुलना में 16.6% की वृद्धि दर्ज की गई। उत्पाद शुल्क ने 37% राजस्व वृद्धि दी, वाहनों पर कर 13% और स्टाम्प और पंजीकरण 28% की वृद्धि हुई। ये राजस्व वृद्धि केवल इसलिए संभव हुई क्योंकि पंजाब में भगवंत मान की पारदर्शी और ईमानदार सरकार है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत हमारी सरकार पंजाब समर्थक है, उन्होंने केवल पंजाब का कर्ज बढ़ाया लेकिन मान सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए पूरी लगन से काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि मान सरकार ने छठा वेतन आयोग लागू किया और लंबित बकाया का भुगतान किया। सभी महत्वपूर्ण विभागों को बेलआउट पैकेज दिया और युवाओं को 36,000 नई सरकारी नौकरियां भी दीं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें 9 से 11 फीसदी ब्याज दर पर कर्ज लेती थीं क्योंकि इसमें उनका कमीशन होता था लेकिन हम 7-9 फीसदी ब्याज पर कर्ज ले रहे हैं क्योंकि हमारी सरकार कर्ज की स्थिति सुधारने के मिशन पर है।

कंग ने कहा कि गवर्नर नियमित प्रक्रिया का राजनीतिकरण कर रहे हैं जो बेहद अनावश्यक है‌। इसके बजाय उन्हें पंजाब के हित में काम करना चाहिए और मोदी सरकार से आरडीएफ के 5600 करोड़ रुपये जारी करने और कर्ज भुगतान पर रोक लगाने के लिए कहना चाहिए ताकि राज्य इस वित्तीय संकट से उबर सके। उन्होंने कहा कि पंजाब किसी चीज की भीख नहीं मांग रहा है बल्कि हम सिर्फ वही मांग रहे हैं जो हमारा हक है।

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