
झारखंड के दुमका जिले के मधुपुर प्रखंड के पहाड़पुर क्षेत्र की रहने वाली राखी देवी ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने बंजर और अनुपयोगी जमीन को उपजाऊ बनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
राखी देवी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने बंजर भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती कर यह साबित कर दिया कि मेहनत से जमीन की तकदीर भी बदली जा सकती है।
बंजर जमीन को मेहनत से बनाया उपजाऊ
पत्थर और कंकड़ से भरी जमीन को खेती योग्य बनाना आसान नहीं था, लेकिन राखी देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मेहनत कर जमीन को तैयार किया और उसमें स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती शुरू की। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि परिवार के भरण-पोषण का मजबूत आधार भी तैयार हुआ।
संघर्ष के बीच हासिल की सफलता
खेती के दौरान राखी देवी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बारिश और कीटों के प्रकोप के कारण उनकी स्ट्रॉबेरी की फसल को नुकसान भी हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी लगन और निरंतर प्रयास के बल पर उन्होंने इन समस्याओं से पार पाया और खेती में सफलता हासिल की।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आज राखी देवी क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव की कई महिलाएं खेती के नए तरीकों को सीखने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राखी देवी न केवल खुद सफल हुई हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं।
स्वरोजगार का नया रास्ता दिखाया
स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ सब्जियों की मिश्रित खेती अपनाकर उन्होंने आय के कई स्रोत विकसित किए हैं। उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान ‘नारी शक्ति’ के मजबूत उदाहरण के रूप में स्थापित हो चुकी है।
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