
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है रामनवमी
महंत विशाल गौड़
इस वर्ष राम नवमी 26 मार्च को मनाई जा रहा है। हालांकि, उदया तिथि को मानने वाले कुछ लोग इसे 27 मार्च को भी मनाएंगे। राम नवमी का त्योहार भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, माना जाता है कि अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में राम के पृथ्वी पर अवतरण का दिन है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई और धर्म (सत्य) की स्थापना का प्रतीक है। भगवान राम का जन्म: पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र मास की नवमी तिथि को दोपहर के समय भगवान राम का जन्म हुआ था।
चौक कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि राम को एक आदर्श राजा, पुत्र, पति और भाई के रूप में उनके उत्तम गुणों और नैतिकता के लिए पूजा जाता है। रामनवमी यह याद दिलाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है, जैसा कि राम ने रावण का विनाश करके स्थापित किया था। रामनवमी का पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। राम नवमी पर लाल, पीले और भगवा झंडे धर्म, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक हैं, जो भगवान श्रीराम के आदर्शों और सनातन परंपरा की आस्था को दर्शाते हैं।

राम नवमी ( संस्कृत : राम नवमी , रोमनकृत : रामनवमी ) एक हिंदू त्योहार है जो हिंदू धर्म में पूजनीय देवता राम के जन्म का उत्सव मनाता है, जिन्हें विष्णु का सातवां अवतार माना गया है। महंत ने बताया कि रामनवमी का पूजन हमेशा सही मुहूर्त में ही करें नहीं तो अशुभ माना जाता है, इसके अलावा, रामनवमी के दिन मांस-मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें और तामसिक भोजन से दूर रहें। रामनवमी के दिन पूजन में भगवान श्री राम का पूजन उनके परिवार और पंचदेवता जैसे सूर्यदेव, श्रीगणेश, मां दुर्गा, शिव जी और विष्णु के साथ ही करें।
रामनवमी पर सात्विक भोजन किया जाता है, जिसमें खीर-पूरी, हलवा, काले चने, और कद्दू या आलू की सब्जी शामिल है। भगवान राम को विशेष रूप से केसरिया भात, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है। व्रत रखने वाले लोग फलाहार के रूप में साबूदाना खिचड़ी, मखाना, मेवे और ताजे फल भी खा सकते हैं। महंत विशाल गौड़ ने बताया कि हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राम जी को खीर बहुत पसंद थी। उनके शासनकाल में अयोध्या की राजगृहों में खीर अक्सर बनाई जाती थी।



